मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने बताया कि बादल छाए रहने की वजह से ही अधिकतम तापमान में कमी आई है। 11 जनवरी तक ऐसे ही मौसम रहेगा, इसके बाद कोहरा छाए रहने और ठंड बढ़ने की संभावना है। इधर शनिवार को अधिकतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस की जगह रविवार को 20 रिकार्ड किया गया, जबकि न्यूनतम 11.1 की तुलना में 13.1 रिकार्ड किया गया।
कोरोना की तीसरी लहर में अब तक जो भी मरीज संक्रमित मिले हैं, उनमें अधिकांश मरीजों में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार वाले लक्षण ही मिल रहे हैं। ऐसे में ठंड के मौसम में बारिश लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। इससे अस्पतालों में ऐसे ही मौसम बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं।
आईएमए के साचिव डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि सर्र्दी के मौसम में वैसे भी बुखार, खांसी वाले मरीज अधिक मिलते हैं। जिस तरह से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं, उसके हिसाब से पहले की तुलना में ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसमें जरा सी लापरवाही से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
अगर बहुत जरूरी न हो तो लोगों को घर में ही रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल सिंह का कहना है कि सर्दी के मौसम में कॉमन फ्लू(सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार) होता ही है। कोरोना काल चल रहा है तो बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार वालों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गर्म कपड़े पहनने, बारिश में भीगने से बचने के साथ ही हल्का गर्म पानी भी पीना जरूरी है। सबसे अधिक जरूरी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना है।
रबी की फसलों के लिए रविवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश आफत साबित हुई है। दलहनी और तिलहनी फसलों के फूल झड़ने और पौधों गिरने पर 10 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा मटर, टमाटर और आलू की फसलों पर इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ सकता है। जिसको लेकर किसानों चिंता बढ़ गई है।