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पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम: बनारस में बारिश से बढ़ी गलन, दो दिन तक ऐसे ही रहने के आसार

Mon, 10 Jan 2022 09:32 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही मौसम में इस तरह का बदलाव हुआ है। मौसम दो दिन इसी तरह रहने की संभावना है। इसके बाद ठंड और बढ़ने की संभावना है। 
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वाराणसी में छाया कोहरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी समेत पूर्वांचल के जिलों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है। रविवार को हुई बारिश के बाद नम हवाओं ने गलन बढ़ा दी है। आज भी धूप नहीं के बराबर निकली है।  बादलों की आवाजाही जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में हल्का कोहरा भी छाया रहा। दोपहर बाद बूंदाबांदी के आसार है।  मौसम वैज्ञानिक के अनुसार जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही मौसम में इस तरह का बदलाव हुआ है। मौसम दो दिन इसी तरह रहने की संभावना है।

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इसके बाद ठंड और बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने 1.8 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड किया है। शनिवार को धूप निकलने के बाद मौसम में राहत की उम्मीद बंधी थी मगर रविवार सुबह 10 बजते-बजते मौसम का रुख बदल गया। दोपहर 12 बजे के बाद कुछ इलाकों में छिटपुट बूंदाबांदी हुई। पूरे दिन बादल छाए रहे। हवा की रफ्तार भी आम दिनों से ज्यादा थी।

शाम पांच बजे के आसपास शहर के कुछ इलाकों में दोबारा बूंदाबादी शुरू हुई जो देर तक चलती रही। मौसम विभाग के मुताबिक दिन में 1.8 मिमी वर्षा हुई। रविवार का अधिकतम तापमान दो डिग्री गिरकर 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।  

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मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने बताया कि बादल छाए रहने की वजह से ही अधिकतम तापमान में कमी आई है। 11 जनवरी तक ऐसे ही मौसम रहेगा, इसके बाद कोहरा छाए रहने और ठंड बढ़ने की संभावना है। इधर शनिवार को अधिकतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस की जगह रविवार को 20 रिकार्ड किया गया, जबकि न्यूनतम 11.1 की तुलना में 13.1 रिकार्ड किया गया।

बारिश और ठंड के मौसम में संक्रमण की संभावना अधिक

कोरोना की तीसरी लहर में अब तक जो भी मरीज संक्रमित मिले हैं, उनमें अधिकांश मरीजों में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार वाले लक्षण ही मिल रहे हैं। ऐसे में ठंड के मौसम में बारिश लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। इससे अस्पतालों में ऐसे ही मौसम बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। 

आईएमए के साचिव डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि सर्र्दी के मौसम में वैसे भी बुखार, खांसी वाले मरीज अधिक मिलते हैं। जिस तरह से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं, उसके हिसाब से पहले की तुलना में ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसमें जरा सी लापरवाही से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

लोगों को घर में ही रहने की जरूरत

अगर बहुत जरूरी न हो तो लोगों को घर में ही रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल सिंह का कहना है कि सर्दी के मौसम में कॉमन फ्लू(सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार) होता ही है। कोरोना काल चल रहा है तो बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार वालों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गर्म कपड़े पहनने, बारिश में भीगने से बचने के साथ ही हल्का गर्म पानी भी पीना जरूरी है। सबसे अधिक जरूरी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना है।
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रबी की फसलों के लिए बारिश बनी आफत

रबी की फसलों के लिए रविवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश आफत साबित हुई है। दलहनी और तिलहनी फसलों के फूल झड़ने और पौधों गिरने पर 10 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा मटर, टमाटर और आलू की फसलों पर इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ सकता है। जिसको लेकर किसानों चिंता बढ़ गई है।
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