औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अनुसार, एक औषधि निरीक्षक को सालाना 200 मेडिकल स्टोर/फर्म का निरीक्षण करना होता है। साथ ही, नए मेडिकल स्टोर/फर्म का सत्यापन कर लाइसेंस जारी करना होता है, मगर मौजूदा व्यवस्था में जौनपुर में एक औषधि निरीक्षक की तैनाती है। यहां 4500 मेडिकल स्टोर पंजीकृत हैं। नियमत: इनकी निगरानी के लिए 23 औषधि निरीक्षकों की जरूरत है, लेकिन यहां पर सिर्फ एक ड्रग इंस्पेक्टर और एक बाबू है। सालाना 200 निरीक्षण के हिसाब से सभी मेडिकल स्टोर का निरीक्षण करने में कई साल लगेंगे। ऐसे में विभाग की तरफ से सिर्फ रैंडम चेकिंग की जाती है।
पूर्वांचल में सबसे ज्यादा मेडिकल स्टोर जौनपुर में हैं
वाराणसी में 2600, आजमगढ़ में 3800, बलिया में 2563, सोनभद्र में 700, मऊ में 2579, जौनपुर में 4500, भदोही में 1500, मिर्जापुर में 1000, गाजीपुर में 3100 और चंदौली में 1200 मेडिकल स्टोर/फर्म हैं।
क्या बोले अधिकारी
विभाग के पास स्टाफ और संसाधनों की कमी है। हमारे पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है कि सभी मेडिकल स्टोर की निगरानी की जा सके है। मुख्य मार्गों के किनारों के ही मेडिकल स्टोरों की जांच हो पाती है। संसाधन बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाता है। कोडीन कफ सिरप मामले में विभाग अपने स्तर पर जांच कर रहा है। संदिग्ध फर्म का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। एसआईटी को दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, जांच में सहयोग किया जा रहा है।
-रजत पाठक, ड्रग इंस्पेक्टर जौनपुर
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माल कहां से आता है, कौन खरीदता है, भगवान ही मालिक हैं: लल्लन यादव
केमिस्ट एंड कॉस्मेटिक वेलफेयर एसोसिएशन, जौनपुर के अध्यक्ष लल्लन यादव ने बताया कि जिले में औसतन एक करोड़ रुपये की दवाओं की खपत है लेकिन निगरानी की व्यवस्था शून्य है। माल कहां से आता है, कौन खरीदता है, कौन क्या दवा खा रहा है, भगवान ही मालिक हैं। कफ सिरप का मामला गरमाने के बाद से ही नारकोटिक्स दवाओं का हिसाब-किताब लिया जाने लगा। 15 दिसंबर को मेरठ में हुई प्रदेशस्तरीय बैठक में कफ सिरप का मुद्दा उठा था। इसमें गलत काम करने वालों की सूचना जिला प्रशासन को देने का निर्णय लिया गया। लल्लन यादव कहते हैं कि औषधि विभाग सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिए ही दवाओं की सैंपलिंग करता है।