प्रशासन ने भी रोक लगा रखा है। ऐसे में मूर्तिकारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। पूजा समितियों ने पिछले दो सालों के पैसे भी अभी तक नहीं चुकाएं हैं। मूर्तिकार साधन चंद्र डे का कहना है कि कोरेाना के कारण ऐसा पहली बार होगा, जब हम लोग मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार नहीं कर पाएंगे।
प्रमिला डे का कहना है कि कोरोना के कारण इस बार बड़ी प्रतिमाएं नहीं बन रही हैं, ऐसे में संभावना है कि इस बार सिर्फ परंपरा को निभाते हुए छोटी प्रतिमा बैठाई जाएगी। अब तक कोई प्रतिमा का ऑर्डर नहीं मिला है।
पांच सौ से ज्यादा स्थापित होते हैं जिले में पंडाल
काशी में दुर्गा पूजा पर पांच सौ से ज्यादा पंडाल स्थापित किए जाते हैं। हर पंडाल में छह से सात प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। अप्रैल से ही कारीगर मूर्ति बनाने में जुट जाते हैं। पुआल, मिट्टी, बांस, रंग, कपड़े इन सब को जुटाने में लगभग चार महीने का वक्त लगता है। अगस्त के अंत तक प्रतिमाओं को तैयार कर सितंबर में उसे फाइनल टच देना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि ना ही कोई प्रतिमा तैयार हुई है और ना ही कोई आर्डर अब तक मिला है।
सरस्वती पूजा के लिए प्रशासन से लगाई गुहार
मूर्तिकारों का कहना है कि दुर्गा पूजा के लिए दुर्गा प्रतिमाएं नहीं बन रही हैं लेकिन फरवरी में सरस्वती पूजा के लिए हम लोगों का काम करना ही पड़ेगा। सरस्वती पूजन में भीड़ नहीं होती है। हम लोगों की प्रशासन से हाथ जोड़कर विनती है कि वह हम लोगों को सरस्वती जी की प्रतिमा बनाने का आदेश जारी कर दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम लोगों के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।