प्रियंका गांधी आजमगढ़ पहुंचीं
- फोटो : अमर उजाला
बिलरियागंज में पीड़ित महिलाओं से मिलकर जब प्रियंका बाहर निकलीं तो बाहर लोग नारेबाजी करने लगे। उनके पीछे अहाते से निकली पीड़ित महिलाएं भी उनसे काफी प्रभावित नजर आईं और लोगों के साथ उन्होंने भी प्रियंका के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान बिलरियागंज में उमड़े हुजूम ने विपक्षी दलों को सोचने के लिए विवश कर दिया है।
इस छोटे से कार्यक्रम के जरिए प्रियंका जहां जनपद में कांग्रेस पार्टी को संजीवनी देकर उसे चर्चाओं में खड़ा कर गईं। वहीं अन्य राजनीतिक दलों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गईं। सपा की मानें तो भीड़ से कुछ अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि भी दो तरह की होती है। एक जो तमाशबीन होती है दूसरी जो उससे प्रभावित होकर आती है। इसलिए भीड़ से कोई राजनैतिक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।
सपा और कांग्रेस के अलग हैं विचार
इस बात को लेकर सपा और कांग्रेस के विचार अलग-अलग हैं। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि बिलरियागंज में मुस्लिम महिलाओं ने प्रियंका के समर्थन में जो नारा लगाया वह अलग बात है। लेकिन मुस्लिम समुदाय जानता है कि आजादी के बाद उनके साथ जो जुल्म और ज्यादती हुई है। उसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस का कार्यकाल था।
कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण दंगे हुए और नौकरियों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी कम हुई। अखिलेश यादव के जनपद आगमन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह अखिलेश यादव का संसदीय क्षेत्र है। वह जरूर आएंगे लेकिन इसकी तिथि वहीं निर्धारित करेंगे। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
क्योंकि यह कार्यक्रम कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं था। प्रियंका जी की ओर से निर्देश नहीं था कि कोई होर्डिंग नहीं लगेगी और ना ही कांग्रेस के समर्थन में नारा लगेगा। लेकिन उनकी सक्रियता से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। काफी दिनों से जिले की जो राजनीति सपा और बसपा के ईर्द गिर्द घूम रही थी, उनके आने से कांग्रेस पार्टी भी चर्चा में आ गई है।