हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड आग्मेंटेशन योजना (हृदय) के तहत काशी की धरोहरों और ऐतिहासिक स्थलों को संवारने की मुहिम गति पकड़ने लगी है। इस योजना के जरिए मजारों और दरगाहों का भी कायाकल्प करने की तैयारी है।
राजघाट स्थित चंदन शहीद की दरगाह को चमकाने का काम शुरू करा दिया गया है। जल्द ही सलापुर स्थित गाजी मियां और अलवी शाह की मजार को भी संरक्षित कराया जाएगा। नगर निगम की देखरेख में संचालित इस योजना के तहत 81 धरोहरों का चिह्नित किया गया है।
धरोहरों को संवारने और संरक्षित करने पर कुल 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। चंदन शहीद की दरगाह पर योजना के तहत गेट बनाने, पत्थर लगाने के अलावा बाउंड्री की मरम्मत कराई जाएगी। पेयजल और प्रकाश के इंतजाम दुरुस्त कराए जाएंगे।
सलारपुर में गाजी मियां और अलवी शाह की मजार को भी संवारने की तैयारियां कर ली गई हैं। जल्द ही इन दोनों स्थानों पर भी काम शुरू कराया जाएगा।
संवरेगा उस्ताद का आवास
शहनाई के बादशाह भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के आवास को भी ‘हृदय’ से भव्यता दी जाएगी। उनके आवास को काशी में शहनाई की पहचान के रूप में विकसित करने की योजना है। साहित्यकार जयशंकर प्रसाद, हजारी प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल के आवासों के अलावा नेपाली मंदिर, गुरुद्वारा को भी योजना के तहत संवारा जाएगा।
पार्श्वनाथ जन्मभूमि, तिलभांडेश्वर, आदिकेशव घाट, तुलसी मानस मंदिर, भारत माता मंदिर को भी धरोहर के रूप में संरक्षित करने की तैयारी है। इनमें अधिकतर स्थानों पर काम शुरू करा दिया गया है।