15 लाख बुनकरों, शिल्पियों के दिन बहुरेंगे। दीनदयाल हस्तकला संकुल के लोकार्पण के माध्यम से प्रधानमंत्री ने जहां चमक खो रहे पूर्वांचल के शिल्प को नई ऊर्जा देने का काम किया तो वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में पूर्वांचल की कला की धाक बनी रहे इसकी तैयारियों की समीक्षा भी करते नजर आए।
बड़ा लालपुर स्टेडियम में शुक्रवार को पहला मौका था जब बुनकर व शिल्पी ने पीएम, सीएम सहित सभी गणमान्यों का स्वागत किया। इसके चलते बुनकर, शिल्पी समाज आह्लादित दिखा।
कबीर अवार्डी रामलाल मौर्य और शिल्प गुरु महेश कुमार सुमन ने बनारसी स्टोल पहनाकर सभी का स्वागत किया। यह चर्चा का केंद्र रहा। वहीं दूसरी ओर संकुल में बुनकरों और शिल्पियों की दूकानों को लेकर पीएम ने वस्त्र मंत्रालय के अधिकारियों से भविष्य की योजनाओं पर भी संक्षिप्त चर्चा की।
इस दौरान पीएम को बताया गया कि यहां कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों का आयोजन किए जाने के साथ ही इसे पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही बड़े कांफ्रेंस और बैठकें भी यहीं आयोजित किए जाने का भरोसा दिलाया गया।
बनारस परिक्षेत्र एवं आसपास के जिलों की लगभग 15 लाख की आबादी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं हस्तशिल्प और हथकरघा से जुड़ी हैं। लगभग 20 हजार करोड़ का कारोबार है। अपने हुनर से देश को करोड़ों रूपये की विदेशी मुद्रा भी दिलाते हैं।
बीते कुछ वर्षों में इन उद्योगों पर विभिन्न कारणों से गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था और बुनकरों, शिल्पियों, कारीगरों का पलायन हो रहा था। पीएम मोदी ने न केवल उनके अंदर भरोसा पैदा करने का कार्य किया बल्कि पूर्वांचल की धूमिल हो रही कला को नई पहचान देने का प्रयास किया।
पीएम मोदी ने स्वयं कहा कि पिछले कई दशकों में शिल्प और बुनकरी को लेकर ऐसा प्रयास नही हुआ था। जो भी हो पीएम ने 15 लाख लोग और उनके आश्रितों के प्रति परवाह दिखाकर और उस क्षेत्र में कार्य करके लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रहे।
जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि पीएम का यह प्रयास बुनकरों, शिल्पियाें के लिए मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही पूर्वांचल के शिल्प और कला की पहचान मजबूत होगी।