पुलिस ने आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया और वारदात में प्रयुक्त असलहा महेंद्र प्रताप राव के घर से बरामद किया था। इसके बाद मुकदमे में महेंद्र प्रताप राव का नाम भी बढ़ा दिया गया। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान एक आरोपी रमेश चंद्र उपाध्याय का निधन हो गया था। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई और करीब छह साल में फैसला आ गया। अदालत ने अपराध को गंभीर माना और कहा कि सगे-संबंधियों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज में भय पैदा करते हैं।
अभियोजन के मुताबिक पुलिस ने आरोप पत्र में बताया था कि पिशाचमोचन कुंड में बाबा की गद्दी पर एकाधिकार और पुश्तैनी मकान पर कब्जे की चाहत में राजेंद्र उपाध्याय ने सगे भाई और भाभी को मौत के घाट उतारा था। इस सनसनीखेज वारदात में राजेंद्र का बेटा रजत और उसका हिस्ट्रीशीटर नौकर रामवीर उपाध्याय भी शामिल था। अदालत ने छह लोगों को दोषी करार दिया है।
बेटों ने नहीं मानी हार, मामले में चौकी इंचार्ज का हुआ था निलंबन
अभियोजन के मुताबिक, तीर्थ पुरोहित दंपति के दो बेटों सुमित और विनीत ने हार नहीं मानी थी। दोनों ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। छह साल तक परेशानियों और प्रताड़ना को झेलते हुए मामले की पैरवी की। अब अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराया है। वारदात के बाद से तीर्थ पुरोहित दंपती के बेटों को प्रशासन ने गनर मुहैया कराया था। इस मामले में कृष्णकांत के बेटे सुमित की शिकायत के आधार पर तत्कालीन लल्लापुरा चौकी इंचार्ज राजकुमार वर्मा को निलंबित कर दिया था।
अभियोजन के मुताबिक, बदमाशों ने ममता उपाध्याय के सीने के अलावा कमर में चार गोली मारी थी। गोलियां छिटक कर आंतों और शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच गई थीं। बीएचयू के पोस्टमार्टम हाउस में ममता के शरीर में लगी गोलियों की सही जानकारी नहीं मिली तो शव का एक्स-रे कराया गया। मंडलीय अस्पताल में एक्स-रे के बाद पता चला कि ममता को चार गोली मारी गई थी। इसके बाद शव को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया था। लगभग छह घंटे बाद पोस्टमार्टम हुआ था।