प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सोमवार को प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती को बगैर किसी जांच के लौटा दिया गया। करीब पौने तीन घंटे तक अस्पताल के बाहर कराह रही महिला ने अस्पताल के सामने सड़क पर एक बच्ची को जन्म दिया। बाद में दाई उसे अस्पताल ले आई, जहां फार्मासिस्ट ने उसे इंजेक्शन लगाया। जच्चा-बच्चा की स्थिति सामान्य है। मामला सोनभद्र जिले का है।
यहां के मधुपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर महज एक डॉक्टर तैनात हैं। एक वार्ड ब्वाय और एक एएनएम है। हाल में ही एएनएम की ड्यूटी मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम में लगा दी गई है। सोमवार की सुबह करीब सात बजे लोहरा गांव स्थित अपने मायके से गर्भवती रिंकू देवी (27) पत्नी रमेश परिवार के सदस्यों के साथ पीएचसी पर पहुंची। वह दर्द से कराह रही थी।
उसके परिवार वालों ने एएनएम को जाकर मामले से अवगत कराया। एएनएम ने रिंकू को देखकर उसे जिला अस्पताल ले जाने की बात कही। फिर कुछ मिनट में ही वह निकलकर मिशन इंद्रधनुष की ड्यूटी में चली गई। इसके बाद गर्भवती के परिवार की महिलाओं ने पुरूषों को पूरे मामले से अवगत कराया। करीब साढ़े नौ बजे जब परिवार वाले अस्पताल पहुंचे, तब तक रिंकू की हालत बिगड़ चुकी थी।
परिवार वाले उसे निजी साधन से जिला अस्पताल ले जाने का इंतजाम कर ही रहे थे कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने सड़क पर पहुंची गर्भवती ने एक बच्ची को जन्म दिया। यह सब देख रही अस्पताल की दाई सड़क पर पहुंची और जच्चा-बच्चा को अस्पताल में ले आईं।
यहां गर्भवती को फार्मासिस्ट ने इंजेक्शन लगाया। इसके बाद परिवार वाले नाराजगी जाहिर करते हुए जच्चा-बच्चा को लेकर घर लौट गए। उधर, सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने इसकी जांच कराई है।
गर्भवती महिला गंभीर हालत में थी। वहां कोई डॉक्टर न होने के नाते एएनएम ने उसे रेफर कर दिया था। यह संयोग था कि महिला को सड़क पर सुरक्षित प्रसव हो गया। इसमें एएनएम या स्वास्थ्यकर्मी की किसी तरह की गलती नहीं है।