वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी पद्मश्री प्रशांति सिंह का कहना है कि आज मैं जहां भी हूं, इसमें मां का बहुत बड़ा योगदान है। वह अपनी सारी उपलब्धियों का श्रेय अपनी मां उर्मिला सिंह को देती हैं। प्रशांति का कहना है कि सिंह सिस्टर्स की कामयाबी में उनकी मां की मेहनत और सहयोग हर कदम पर मिला।
उन्होंने समाज की परवाह ना करके वो फैसला किया जो उनकी बेटियों के लिए उचित था। प्रशांति और उनकी बहनें प्रियंका सिंह, दिव्या सिंह, आकांक्षा सिंह और प्रतिमा सिंह जिस परिवार से आतीं हैं, वहां पहले लड़कियों का खेलना अच्छा नहीं माना जाता था। यही वजह रही कि जब इन लड़कियों ने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया तो लोग इनका समर्थन करने की जगह उनको सलाह देने लगे कि पुरुषों का खेल लड़कियों को नहीं खेलने चाहिए तो दूसरी ओर पेशे से टीचर इन बहनों की मां उर्मिला सिंह ने ऐसी बातों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और हमेशा अपनी बेटियों को इस खेल के लिये प्रोत्साहित किया। यही वजह है कि आज वो ही लोग जो कल तक इन लड़कियों के खेलने पर उंगली उठाते थे, वो आज उनकी तारीफ करते नहीं थकते। हर कोई अपने बच्चे को डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनाना चाहता है, ऐसे बहुत कम माता-पिता हैं, जो अपने बच्चों का भविष्य खेलों में देखते हैं।