आईआईटी बीएचयू के जैव रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के शोध छात्र ने एक पोर्टेबल सेंसिंग डिवाइस तैयार किया है। इसके माध्यम से दूध के रोगाणुओं को नष्ट किया जा सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर सात जून को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडविया ने शिक्षक डॉ. प्रांजल चंद्रा और उनके शोध छात्र सुप्रतिम महापात्रा को सम्मानित किया।
जैव-रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के शोध छात्र ने ईट सेफ विषय के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ईट राइट रिसर्च अवार्ड -2022 जीता है। यह पुरस्कार डॉ. प्रांजल चंद्रा और उनकी टीम को नैनो-इंजीनियर पोर्टेबल सेंसिंग डिवाइस पर आधारित उनके अविष्कार के लिए दिया। पुरस्कार के लिए कुल 280 आवेदन आए थे, जिसमें सामाजिक प्रभाव डालने वाले अत्याधुनिक तकनीकों को स्क्रीनिंग के माध्यम से चुना गया। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने बधाई देते हुए कहा कि डॉ. प्रांजल चंद्रा की शोध टीम द्वारा प्राप्त पुरस्कार बहुत ही नवीन और उत्कृष्ट कार्य है।
क्षारीय फॉस्फेट की मात्रा की पहचानेगा डिवाइस
डॉ. प्रांजल चंद्रा ने कहा कि यह डिवाइस मूल रूप से एक एकीकृत प्रणाली है। यह व्यक्तिगत रूप से केवल कुछ सेकेंड में क्षारीय फॉस्फेट की प्रत्यक्ष मात्रात्मक पहचान करेगा, जो दूध पाश्चराइजेशन का संकेतक है, यह बायोइलेक्ट्रॉनिक उपकरण हथेली के आकार का है और लघु सेटिंग में टेस्ट मोलिक्युल की ऑनसाइट पहचान के लिए बहुत आसान है।