वाराणसी में छाया कोहरा
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कूड़ा जलाए जाने से प्रदूषण
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आईक्यूएयर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुवार बनारस 339 एक्यूआई के साथ देश का तीसरा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा जबकि जौनपुर 333 एक्यूआई के साथ चौथे नंबर पर था। वाराणसी शहर के इलाकों में साकेत नगर 425 एक्यूआई के साथ सबसे अधिक प्रदूषित, इसके बाद लंका का एक्यूआई 361, बलभद्र कॉलोनी का 339, रामनगर का 312, नाटी इमली रोड का एक्यूआई 296 दर्ज किया गया। सड़क पर उड़ रही धूल और जगह-जगह जलाए जा रहे कूड़े व ठंड के कारण हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ी है।
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. एसएन पांडेय के अनुसार, सड़कों की खोदाई के बाद मरम्मत का काम जल्द से जल्द करें। गहरी खोदाई के दौरान पानी जरूर डालें। जो एजेंसी सड़क खोदने का काम कर रही हैं, वह प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, प्रशासन और शासन को रिपोर्ट सौंपे। पेड़ों को काट कर मल्टी स्टोरीज बिल्डिंग बनाई जा रही हैं और वह भी बिना ढंके। कोई भी कंस्ट्रक्शन ढंक कर होना चाहिए और पेड़ भी लगने चाहिए। ट्रैफिक के लिए मास्टर प्लान बनाएं और सही डायवर्जन पर काम करें।
वायु पॉल्यूशन माइक्रोग्राम परक्यूबिक मीटर में मापा जाता है। पीए 2.5 का मतलब सांस के साथ अंदर जाने वाले पार्टिकल और 2.5 माइक्रोंस से छोटे पार्टिकल से है। एयर पॉल्यूशन को मापने में पीएम 2.5 कंसंट्रेशन सबसे अच्छा सूचक माना जाता है।