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काशी में प्रदूषण: साल के शुरुआती 61 दिनों में एक भी दिन स्वस्थ नहीं रही हवा, 15 दिन ‘खतरनाक’; जानें AQI का हाल

Tue, 03 Mar 2026 11:54 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi Pollution: वाराणसी में प्रदूषण बढ़ रहा है। वायु की गुणवत्ता का सूचकांक भी गंभीर है। बीते 24 घंटों में वाराणसी में रात 11 बजे एक्यूआई 252 और शाम 5 बजे 128 दर्ज किया गया।
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वाराणसी में प्रदूषण (सांकेतिक फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Varanasi News: साल की शुरुआत से ही जिले की आबोहवा ठीक नहीं है। 1 जनवरी से लेकर दो मार्च तक 61 दिनों में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब श्रेणी में रहा है। प्रदूषण मापने वाली वेबसाइट एक्यूआई डॉट इन के मुताबिक इन 61 दिनों में 15 दिन एक्यूआई ‘खतरनाक’, 31 दिन ‘गंभीर’ और 15 दिन ‘अस्वस्थ’ श्रेणी में दर्ज किया गया। नवंबर 2025 से ही वायु गुणवत्ता का स्तर खराब बना हुआ है। 

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जिले की आबादी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और रोजाना लाखों लोगों का आवागमन हो रहा है। शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र, लगभग सभी इलाकों में एक्यूआई खराब है। वाहनों की बढ़ती संख्या, फैक्ट्रियों से निकलने वाली जहरीली गैस, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।

खतरनाक है एक्यूआई

खराब एक्यूआई का असर आमजन की सेहत पर भी पड़ रहा है। लोगों में सांस की तकलीफ, आंखों में जलन, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सोमवार को शहर का एक्यूआई 202 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्यूआई में सुधार के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।

इस साल 2 जनवरी और 2 फरवरी को सबसे अधिक दर्ज हुआ एक्यूआई: साल 2026 की शुरुआत से अब तक सबसे अधिक खराब एक्यूआई 2 जनवरी को दर्ज किया गया, जब यह 409 रहा। वहीं 2 फरवरी को वाराणसी का एक्यूआई 303 दर्ज किया गया जो ‘खतरनाक’ श्रेणी में माना जाता है। 

बीते दो वर्षों में सबसे कम एक्यूआई 21 फरवरी 2024 को 29 दर्ज किया गया था। एक्यूआई की वेबसाइट पर प्रदर्शित आंकड़ों के अनुसार 14 और 15 फरवरी की दरम्यानी रात 11 बजे सबसे अधिक तथा शाम 4 बजे सबसे कम एक्यूआई दर्ज किया गया।

साल 2025 में एक्यूआई का औसत आंकड़ा 
  • जनवरी: 119 (मध्यम)
  • फरवरी: 100 (मध्यम)
  • मार्च: 109 (मध्यम)
  • अप्रैल: 21 (सबसे कम)
  • जुलाई: 81 (बरसात के कारण कम)
  • नवंबर: 589 (अधिक प्रदूषित)
  • दिसंबर: 346 (अत्यधिक प्रदूषित)

सुधार के लिए ये कदम जरूरी
  • इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देना।
  • फैक्टरियों में फिल्टर की अनिवार्यता और सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन।
  • निर्माण स्थलों को कवर करना, सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव और खुले में मलबा या रेत न छोड़ना।
  • खुले में कचरा जलाने पर रोक तथा कचरा पृथक्करण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा।
  • एनसीआर की तर्ज पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) लागू करना।

शहर के एक्यूआई की निगरानी हम करते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मंत्रालय की ओर से विभिन्न विभागों को बजट दिया जाता है। विभागों की ओर से काम भी किए जा रहे हैं। जल्द ही इसमें सुधार देखने को मिलेगा। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

काशी में बढ़ा शोर, औसत डेसिबल 55 से 75 पहुंचा
सांस्कृतिक नगरी काशी में शांति की जगह अब शोर बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 और 2026 में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई है। रियल-टाइम नॉइज मॉनीटरिंग के आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि शहर के कई प्रमुख रिहायशी और वाणिज्यिक क्षेत्रों में दिन और रात दोनों समय शोर का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण धमनियों और रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत (एंडोथेलियम) में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव उत्पन्न करता है। 2024 में औसत स्तर 51 से 55 डेसिबल के बीच था, जबकि 2025-26 में यह 75 तक पहुंच गया है। 

2024 के आंकड़े 
  • मौन क्षेत्र, आईईएसडी, बीएचयू: जनवरी से मई तक दिन का औसत 51–55 डेसिबल (सीमा 50), रात 42–46 डेसिबल (सीमा 40)
  • आवासीय क्षेत्र, नदेसर: दिन 56–59 डेसिबल (सीमा 55), रात 46–49 डेसिबल (सीमा 45)
  • भेलूपुर: दिन 63–66 डेसिबल, रात 54–57 डेसिबल (सीमा के आसपास)
  • चांदपुर: दिन और रात दोनों समय औसत स्तर सीमा के नीचे
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स्थायी बहरापन भी हो सकता है
बीएचयू के कान, नाक और गला विभाग के डॉ. विश्वंभर ने कहा कि बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से बहरेपन की समस्या बढ़ रही है। सड़क यातायात का तेज शोर और इयरफोन का अत्यधिक उपयोग सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से कानों की नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे स्थायी बहरापन हो सकता है। उन्होंने गाड़ियों में तेज हॉर्न पर नियंत्रण और इयरफोन के सीमित उपयोग की सलाह दी।
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