शनिवार की दोपहर 12 बजे प्रध्ाानमंत्री के संसदीय दफ्तर पर जनसुनवाई करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के प्रति प्रदेश सरकार का रवैया गैर जिम्मेदाराना है। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर तो बना दिए मगर न तो वहां साफ सफाई की मुकम्मल व्यवस्था है और न ही कैंप में रह रहे लोगों को समय से नाश्ता व खाना ही मिल रहा है। वहीं, इसके ठीक दो घंटे बाद बाढ़ के हालात की समीक्षा करने आए प्रदेश के लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने केंद्रीय मंत्री के बयान पर पलटवार किया। कहा कि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और गृह मंत्री राजनाथ सिंह का गृह क्षेत्र होने के बावजूद केंद्र सरकार बाढ़ पीड़ितों के प्रति गंभीर नहीं है। राज्य सरकार ने बाढ़ की विभीषिका से निबटने के लिए केंद्र सरकार से मदद का आग्रह किया है लेकिन केंद्र ने अब तक कोई सुध नहीं ली है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के प्रति प्रदेश सरकार का रवैया लापरवाही भरा है। राहत शिविरांे में न साफ सफाई न वहां रह रहे लोगों को समय से नाश्ता-खाना। जिला प्रशासन तो बाढ़ पीड़ित इलाकों में पर्याप्त संख्या में राहत सामग्री और नाव भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। यह हाल वाराणसी ही नहीं बाढ़ से प्रभावित चंदौली, मिर्जापुर व भदोही समेत पूर्वांचल के हर जिले का है।
पीएम मोदी के रवींद्रपुरी स्थित जनसंपर्क कार्यालय पर खुले बाढ़ राहत सहायता शिविर का निरीक्षण करने के उपरांत मीडिया से बातचीत में चंदौली के सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि बाढ़ से घिरे इलाकों के हालात बेहद खराब हैं। लोगों ने बताया कि नावों की कमी के चलते राहत सामग्री नहीं बंट पा रही है। बताया कि पर्याप्त राहत सामग्री संसदीय कार्यालय में मौजूद है। भाजपा कार्यकर्ताओं की मदद से उसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में बांटा जा रहा है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटे भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह की सराहना की।
सूबे के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी के प्रतिनिधि हैं तो गृह मंत्री राजनाथ सिंह चंदौली के रहने वाले हैं। इसके बाद भी बाढ़ को लेकर केंद्र सरकार ने कोई सुध नहीं ली है। शनिवार को यहां बाढ़ के हालात की समीक्षा करने के बाद शिवपाल यादव विकास भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा शासित प्रदेशों के सीएम बाढ़ के प्रति कितने संवेदनशील हैं कि इसका उदाहरण आप देख चुके हैं।
मुख्यमंत्री दो लोगों के कंधों पर चढ़कर बाढ़ का जायजा लेने गए थे। शिवपाल यादव ने दावा किया कि बाढ़ राहत के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। बाढ़ राहत के लिए जिलों की ओर से जो भी धनराशि मांगी गई है, उसे शनिवार की देर शाम तक जारी कर दिया जाएगा। बता दें कि वाराणसी में बाढ़ राहत के लिए जिला प्रशासन ने छह करोड़ रुपये की मांग की थी, इसमें से दो करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के बाढ़ में डूबने के सवाल पर कहा कि इस समय सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों की जान-माल की रक्षा करना है। वरुणा कॉरिडोर का काम बाढ़ के बाद फिर शुरू होगा। कहा कि वाराणसी जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह बाढ़ पीड़ितों को 15-15 दिन का राशन एक बार में उपलब्ध कराए।
अनाज के साथ ही पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन से बाढ़ में हुए नुकसान के आकलन के साथ ही मुआवजा संबंधी रिपोर्ट मांगी गई है। प्रदेश सरकार जल्द से जल्द मुआवजा देने का प्रयास करेगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाराणसी में 66 हजार हेक्टेयर और चंदौली में 27 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का निर्माण भी जल्द कराया जाएगा।