सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह ने कहा कि राजनीति विज्ञानियों को देश की सभ्यता, समानता, स्वतंत्रता और लोकतंत्र के बारे में सोचना चाहिए ताकि देश का भला हो सके। वे रविवार को बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में अखिल भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के 56वें अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
तीन दिवसीय अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि राजनीति शास्त्र के विद्वानों का आह्वान किया कि नई परिस्थितियों में नए सिद्धांतों की रचना करें। उन्होंने संविधान को भारत की और मौलिक अधिकार को संविधान की आत्मा बताया। कहा कि देश को संविधान के माध्यम से ही महाशक्ति का दर्जा दिलाया जा सकता है। न्यायमूर्ति ने कहा कि री-इवेंटिंग का मतलब राजनीति विज्ञान का पुनर्विष्कार है। कौटिल्य के राजनीति विज्ञान के सिद्धांतों का उदाहरण देते हुए कहा कि कौटिल्य के सिद्धांत आज के संदर्भ में प्रासंगिक हैं।
अखिल भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के अध्यक्ष गोपाल रेड्डी ने कहा कि राजनीति विज्ञान के पुन: परिष्कार की जरूरत है। राजनीति विज्ञान के अध्यापकों को सैद्धांतिक पक्ष के साथ व्यावहारिक पक्ष पर भी ध्यान देने की जरूरत है। प्रो. संजीव शर्मा ने परिषद को मजबूत करने पर बल दिया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पं. गोविंद बल्लभ पंत द्वारा स्थापित इस परिषद को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही राजनीति विज्ञानियों को नए सिद्धांत को स्थापित करना आवश्यक है। झारखंड के कृषि एवं पशुपालन मंत्री रणधीर कुमार सिंह ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए राजनीति विज्ञानियों को आगे आना होगा। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र आदि उपस्थित थे।