प्रशासनिक भवन में कुलपति, कुलसचिव को छात्रों ने घेरा, एक घंटे तक चली बहस
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माई सिटी रिपोर्टर वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हॉस्टल का कमरा सील होने और खाली कराने के विरोध में बुधवार को छात्रों ने हंगामा किया। प्रशासनिक भवन पहुंचकर पहले गेट के पास कार्रवाई को गलत बताते हुए नारेबाजी की। अंदर पहुंचकर कुलपति और कुलसचिव का घेराव किया। एक घंटे तक हंगामे के बीच छात्रों की पुलिस से भी नोकझोंक हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को बताया कि हॉस्टल में रहने वाले वैध छात्रों को बाहर नहीं निकाला जाएगा। अवैध छात्र किसी भी कीमत पर हॉस्टल में नहीं रह पाएंगे। अभियान में आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल में 39 और लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास में 10 कमरों को अवैध बताकर सील किया गया। मुख्य गृहपति डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह के अनुसार जो कमरे खाली करवाए गए हैं, उसे वैध छात्रों को आवंटित किया जाएगा। कमरा सील होने के विरोध में छात्र बुधवार दोपहर प्रशासनिक भवन के सामने हंगामा करने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि बिना किसी सूचना के जिस तरह से हॉस्टल खाली कराया गया, वह गलत है। मुख्य गृहपति डॉ. नागेंद्र भी पुलिस के साथ प्रशासनिक भवन पहुंचे तो उनसे भी छात्रों से नोकझोंक हुई। कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय, मुख्य गृहपति डाॅ. नागेंद्र के साथ एक कमरे में बातचीत हुई। छात्रों को कुलपति ने चेताया कि हॉस्टल में वैध छात्र ही रहेंगे, अवैध छात्रों को कमरा खाली करना ही पड़ेगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
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30 तक सभी हॉस्टल खाली होंगे, वैध छात्र ही रहेंगे : मुख्य गृहपति विश्वविद्यालय में हॉस्टल खाली करने को लेकर हंगामे के बाद मुख्य गृहपति डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सभी हॉस्टल 30 जून तक खाली होंगे। नियमानुसार यहां केवल वैध छात्र ही रहेंगे। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताया कि परीक्षाएं खत्म हो गई हैं। ऐसे में छात्रों से 25 तक हॉस्टल खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। 30 जून तक प्रशासन हॉस्टल खाली करा देगा।
कमरा किसी और का, रहते थे बाहरी युवक विश्वविद्यालय ने जिन 49 कमरों को सील कराया है, उसमें अवैध छात्र रहते थे। लंबे समय बाद इस तरह की कार्रवाई हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार कमरा जिस छात्र के नाम से आवंटित था, उसमे मौके पर वह नहीं मिला। इसकी सूचना लंबे समय से थी, बहुत जांच, पड़ताल के बाद ही कार्रवाई हुई है। कागज में किसी और का नाम है जबकि उन कमरों में बाहरी युवक रहते थे। चर्चा तो इस बात की भी है कि जिन छात्रों के नाम पर कमरा आवंटित होता है, वहीं अपने कमरे में बाहरी छात्रों को रखवाते हैं।