मुरारी की बातों में आकर उसने अपने परिचित दो बच्चों का एनसीसी और तीन का सीएचएस में दाखिला कराने के नाम पर हर एक छात्र से 30 हजार रुपये दिलवाए। पैसा लेने के बाद मुरारी दोनों छात्रों को एनसीसी में दाखिला दिलाने के लिए पहले फिजिकल टेस्ट करने के बहाने कृषि विज्ञान संस्थान की झाड़ी में ले गया और वहां आप्राकृतिक दुष्कर्म किया।
इसके बाद बच्चों को कुछ दिन बरगलाता रहा। इस बीच अपना मोबाइल बंद कर दिया। बच्चों ने पूरी आपबीती पैसा दिलाने वाले व्यक्ति से बताई। उसने पूरी प्लांनिग के साथ सोमवार को मुरारी को फोन कर दो और बच्चों का प्रवेश कराने के लिए पैसा देने के लिए बुलाया। इस दौरान उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया।
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पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी ने बीएचयू के पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़ा कर दिया। सारी प्रवेश परीक्षाएं ऑनलाइन होने के बाद भी कैसे जालसाजी कर बच्चों को प्रवेश दिलाने में जालसाज कामयाब हो रहे हैं। सीएचएस में बच्चों को प्रवेश दिलाने के नाम पर पकड़े गए आरोपी ने पुलिस को बताया कि सत्र 2020 में दो बच्चों का दाखिला पैसा लेकर सीएचएस में कराया। दोनों बच्चे पढ़ रहे हैं।
आरोपी के अनुसार, सीएचएस में पढ़ाने वाले एक शिक्षक से उसकी जान-पहचान है। उन्हीं से मिलकर छात्रों का प्रवेश करवाया था। प्रभारी लंका महातम यादव ने बताया कि आरोपी और उसके सारे करीबियों से पूछताछ की जाएगी।
पुलिस हिरासत से भागा था आरोपी
लंका थाने में सोमवार की देर शाम पुलिसकर्मियों में तब हड़कंप मच गया। जब पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया आरोपी मुरारी मुंशी और दीवान को चकमा देकर थाने से फरार हो गया। ड्यूटी पर तैनात संतरी को भनक तक नहीं लगी। थाने में बैठे पुलिसकर्मियों की नजर उसके ऊपर पड़ी। तब पुलिस के पीछा करने के बाद रविदास गेट के पास से पकड़ा गया।
पुलिस हिरासत में लेकर थाने आ गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सास ली। कार्यवाहक इंस्पेक्टर लंका महत्तम यादव ने बताया था कि एक युवक ने फोन कर आरोपी की बीएचयू में होने की सूचना दी थी। जिसके बाद दरोगा प्रीतम तिवारी पुलिस टीम के साथ युवक को हिरासत में लेकर थाने आए थे। जिसके बाद आरोपी को पूछताछ के लिए बैठाया गया था। लेकिन थोड़े देर बाद कब गायब हो गया पता नहीं चला।