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महासंग्राम 2019: वाराणसी से 'मोदी वंस अगेन', प्रधानमंत्री ने इशारों में बताई इसकी वजह

Mon, 11 Mar 2019 10:51 AM IST
Sayali Maurya प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
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नरेंद्र मोदी(फाइल फोटो) - फोटो : twitter
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लोकसभा चुनाव 2019 की तिथि घोषित होने के बाद से चुनावी महासंग्राम शुरू हो गया है। लेकिन इसके पहले 8 मार्च को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।

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इसी क्रम में 8 मार्च को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास कर के अपनी छवि को चुनावी क्षेत्र में और ज्यादा सशक्त बनाया है। काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को संदेश और काशीवासियों को संकेत दे दिया कि गंगा के निर्मलीकरण का अभियान बाबा दरबार से विस्तार और नया आकार लेने वाला है। 

पीएम नरेंद्र मोदी ने बता दिया कि तमाम आलोचनाओं और विरोध के बावजूद उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर को सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित और संरक्षित करने की जो पहल की थी, वह आगे बढ़ गई है। ‘काशी विश्वनाथ धाम’ से कमोवेश यह भी तय हो गया कि लोकसभा के अगले चुनाव में भी काशी केंद्रीय राजनीति का केंद्र बनी रहेगी।
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24 अप्रैल, 2014 को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कहा था- ‘न मुझे किसी ने भेजा है। न मैं यहां आया हूं। मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है।’ अब अगले लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले उन्होंने बहुप्रतीक्षित काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास कर साफ कर दिया कि वह इसका शुभारंभ भी करना चाहेंगे। 

उन्होंने कहा भी- ‘अगर तीन साल के उनके कार्यकाल में राज्य की पिछली सरकार ने सहयोग किया होता तो आज धाम का शुभारंभ होता, शिलान्यास नहीं।’ समर्थक इसे समझ गए हैं कि उन्हें ‘वंस मोर’ या ‘मोदी अगैन’ कहने की नहीं, पिछली बार की जीत का अंतर बढ़ाने के लिए जुटने की जरूरत है। काशी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र तो है ही, गंगा यहीं उत्तर वाहिनी होती है और द्वादश ज्योर्तिलिंगों में एक काशी पुराधिपति भी यहीं हैं। 

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वाराणसी से दोबारा साधे जाएंगे उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्य

pm modi in varanasi - फोटो : amar ujala
सियासी तौर पर वाराणसी से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के साथ ही बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ पर भी प्रभाव पड़ता है। 2014 में हिंदू चेहरे और हिंदुत्व के एजेंडे को यहां से ही आगे बढ़ाने में मदद मिली थी। अब तो मोदी सरकार के पास विश्वनाथ धाम के रूप में विकास का हिंदुत्व मॉडल भी हैं। पीएम के तौर पर मोदी ने ‘भक्ति में शक्ति’ समेत अपनी कई सोच साकार कर दी हैं। यही वजह है कि मोदी को प्रशंसक ‘मैन ऑफ डेवलपिंग इंडिया’ के तौर पर देखते हैं।

सियासतदां कहते हैं कि काशी विश्वनाथ धाम के शिलान्यास से निकला रास्ता धार्मिक होने के साथ-साथ सियासी भी है। मोदी ने धाम के लिए भूमि पूजन कर बता दिया है कि काशी के कायाकल्प की उनकी कल्पना में अभी और भी कुछ है। उन्हें एक और मौका ‘सर्व विद्या की राजधानी’ से ही मिलना चाहिए। वहीं विपक्ष भी अब तक उनके खिलाफ ‘उपयुक्त उम्मीदवार’ तलाश रहा है। 

उधर, काशीवासी स्मार्ट सिटी बनने, पौराणिक धरोहरों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण-संवर्धन और स्वच्छता और पर्यावरण के लिहाज से शहर की रैंकिंग को बेहतर करने के साथ-साथ काशी को बौद्धिक राजधानी बनते हुए देखने की इच्छा रखते हैं। यही नहीं, पूर्वांचल में अपना दल (एस) और सुभासपा के ‘जातिगत जोड़तोड़’ के मद्देनजर मोदी का वाराणसी से दोबारा चुनाव लड़ना नामुमकिन नहीं है।
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