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वाराणसी में पीएम मोदीः बच्चों से बोले- स्कूल में लाइब्रेरी नहीं थी, दूसरों से किताब मांग कर पढ़ते थे

Tue, 18 Sep 2018 09:44 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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बच्चों से वादा लिया दिन में चार बार मेहनत करेंगे, पसीना बहाएंगे - फोटो : amar ujala
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स्कूली बच्चों के साथ अपना 68वां जन्मदिन मनाने नरउर गांव के प्राथमिक विद्यालय पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचपन के दिनों को खूब याद किया। उन्होंने स्कूल में तीन स्थानों पर 160 बच्चों संग ‘मन की बात’ की और उनके मन को भी टटोला। बच्चों के साथ प्रधानमंत्री ने चिरपरिचित अंदाज में संवाद के दौरान विश्वकर्मा जयंती का जिक्र कर उनसे भगवान विश्वकर्मा की भांति रचयिता बनने का आह्वान किया। सवाल पूछने पर कक्षा सात की छात्रा आकांक्षा पटेल ने उन्हें सृष्टि के रचियता की कहानी भी सुनाई।
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बच्चे जहां उल्लास और उत्साह से लबरेज थे, वहीं पीएम मोदी अभिभावक और शिक्षक की भूमिका में सहज और सरल रहे। बच्चों ने जन्मदिन मनाया तो पीएम मोदी ने उन्हें रिटर्न गिफ्ट देकर उनके चेहरे पर खुशी बिखेर दी।  प्रधानमंत्री ने कहा, हर मेहनत करने वाला व्यक्ति विश्वकर्मा है। जो व्यक्ति मकान बनाता है, बिजली के तार लगाता है, सड़कें बनाता हैं, वह विश्वकर्मा है और हमारे देश में विश्वकर्मा को भगवान माना जाता है।  आह्वान किया आप अपने सपनों का सृजन करें और उसे पूरा करने में अपनी पूरी ऊर्जा, पूरी मेहनत लगा दें। उन्होंने बच्चों से वादा भी लिया कि दिन में आप कम से कम चार बार मेहनत वाला पसीना बहाइए। पढ़ाई के साथ खेलकूद में पसीना बहाइए। 

 उन्होंने बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। बच्चों से कहा, सवाल पूछने में मत झिझकिए। ये सीखने की सबसे अहम कड़ी है। सभी बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हां में जवाब दिया।  कुछ ही देर में बच्चों की झिझक खत्म हो गई। बच्चों ने सवाल पूछे और पीएम मोदी ने सबके जवाब दिए। बच्चों ने उपहार के तौर पर उन्हें ग्रीटिंग कार्ड दिए और उनका हाथ पकड़ कर स्कूल दिखाया। पीएम मोदी ने स्कूल में रूम टू रीड, स्मार्ट क्लासेज और लाइब्रेरी को देखा।  
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 सवाल-जवाब के दौरान एक बच्चे ने पूछ लिया-यहां इतनी देर से क्यों आए? पीएम मोदी ने बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हुए जवाब दिया, बेटा समय नहीं मिलता है। बच्चों ने पीएम से पूछा कि बचपन में कैसे पढ़ते थे? आपके विद्यालय में लाइब्रेरी थी? आपको मास्टर साहब डांटते थे कि नहीं। पीएम ने बताया, वह बचपन में मन लगाकर पढ़ते थे। लाइब्रेरी नहीं थी इसलिए दूसरे बच्चों से किताब मांगकर पढ़ते थे। गलती करने पर मास्टर साहब प्यार से समझाते थे। इसके बाद मैं वह गलती दोबारा नहीं करता था। 

 प्रधानमंत्री के जाने के बाद बच्चों को केक काट कर खिलाया गया। बच्चों को दिए गए लाल रंग के बैग में पाठ्य पुस्तक और अन्य सामग्री बांटी। बैग में किताबों-कॉपियों के अलावा पेंसिल बाक्स है। बाक्स में दो पेंसिल, एक रबर, एक कटर, एक स्केल है। इसके अलावा सौर ऊर्जा का एक लैंप भी है, ताकि बिजली जाने पर बच्चे इसकी मदद से पढ़ सकें। इसे चार्ज करने का उपकरण भी दिया गया है। बच्चों को नाश्ते का पैकेट भी दिया गया। 

 विद्यालय पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत बच्चों ने भारत माता की जय के उद्घोष से किया। कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत ‘स्वागतम्...’ प्रस्तुत किया। स्काउट एंड गाइड की छात्राओं ने स्वागत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय मौजूद रहे। 



 

प्रधानमंत्री ने जन्मदिन पर बाबा दरबार में मत्था टेका

- फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 68वें जन्मदिन पर सोमवार देर रात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। षोडषोपचार विधि से बाबा की पूजा के बाद उन्होंने मंदिर विस्तारीकरण की तैयारियों को भी देखा। इस दौरान बाहर निकलने पर मौजूद लोगों ने हर हर महादेव के जयघोष से उनका स्वागत किया। 

 बच्चों संग जन्मदिन मनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी देर शाम वाराणसी पहुंचे और सबसे पहले उन्होंने नरउर प्राथमिक विद्यालय में रीड टू रूम को देखा और फिर बच्चों से बातचीत की। बच्चों ने उत्साह के साथ उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

इसके बाद डीएलडब्ल्यू में पीएम मोदी ने काशी विद्यापीठ के छात्रों और उनसे सहायतित कूड़ा बीनने वाले बच्चों से बात की। पीएम ने इन बच्चों को मेहनत करने और पढ़ लिखकर आगे बढ़ने की सलाह दी। देर रात प्रधानमंत्री शहर में निकले और शहर में की गई भव्य सजावट को निहारते हुए डीएलडब्ल्यू, महमूरगंज और रथयात्रा मार्ग से बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। 

पीएम ने नरउर प्राथमिक विद्यालय में जांची शिक्षा की गुणवत्ता

- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नरउर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों में शिक्षा की गुणवत्ता परखी। जन्मदिन पर स्कूली बच्चों के बीच पहुंचे पीएम ने उनके सुनने समझने का तरीका, वर्णमाला ज्ञान, शब्द भंडार, धारा प्रवाह और लेखन शैली सबको जांच लिया।

बच्चों द्वारा दिए गए ग्रीटिंग्स को उन्होंने ध्यान से देखा। बच्चों ने ग्रीटिंग्स पर अपने फोटो के साथ कमेंट भी लिखे थे। वास्तव में बच्चों ने यह सब लिखा है या फिर उनके अधिकारियों ने लिखकर बच्चों को थमाया है, जानने के लिए पीएम मोदी ने कुछ बच्चों को दूसरा सादा ग्रीटिंग्स देकर लिखवा कर देखना चाहा। बच्चों ने इसे उसी तरह लिख दिया, जैसा पहले लिखे थे। इसके बाद पीएम ने बच्चों से कहा, किताब पढ़ना आता है? 

जवाब में हां कहते हुए बच्चे किताब पढ़ने लगे। इस पर पीएम ने पता लगाया कि वास्तव में बच्चे पढ़ पा रहे हैं? उन्होंने बच्चों को दूसरी पुस्तक दी और उसे पढ़ने के लिए कहा। बच्चों ने उस पुस्तक को भी पढ़कर सुना दिया। इस पर पीएम ने बच्चों को शाबाशी दी। कहा, खूब मन लगाकर पढ़ो आगे बढ़ो। 

उधर, जिस समय पीएम मोदी बच्चों का आईक्यू लेवल जांच रहे थे, वहां मौजूद शिक्षकों के पसीने छूट रहे थे। पीएम मोदी के स्कूल में आने के दो घंटे पहले से कार्यक्रम खत्म होने के एक घंटे बाद तक भीड़ गांव में डटी रही। 
 

पीएम मोदी ने माना, बचपन में गणित से लगता था डर 

बच्चों के साथ संवाद करते पीएम - फोटो : amar ujala
प्राथमिक विद्यालय नरउर में संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राथमिक विद्यालय मोहनसराय की बेबी कुमारी के सवाल पर बताया कि उन्हें बचपन में गणित से डर लगता था। दूसरा सवाल नैंसी ने पूछा, मोदी अंकल, क्या आप बचपन में शैतानी करते थे? इस पर उन्होंने माना कि वह बचपन में थोड़ी शरारत किया करते थे।

कुछ ऐसे ही सवाल जवाब प्रधानमंत्री और प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के साथ हुए। रूम टू रीड में पीएम मोदी ने बच्चों से रूम टू रीड के बारे में जब पूछा तो विनीता ने बताया कि जो कहानियां हम दादी नानी से सुना करते थे, वहीं कहानियां हमें यहां की लाइब्रेरी में पढ़ने को मिलती हैं। हमारी पढ़ने की क्षमता विकसित होती है। इस पर पीएम मोदी ने बच्चों से कहा कि किताबें पढ़ने से जहां आपकी जमीन मजबूत होती है, वहीं लिखने की आदत से आपके विचारों को धार मिलती है। 

पूर्व माध्यमिक विद्यालय ककरहिया के धीरज मौर्या ने पूछा, आप जब छात्र थे तो कितनी देर पढ़ाई करते थे? पीएम जवाब दिया वह लाइब्रेरी में जाकर वहां की सबसे मोटी किताब लाते थे। उसे एक ही दिन में पूरा पढ़ जाते थे और अगले दिन उसे वापस कर देते थे। एक दिन लाइब्रेरियन ने तो मुझसे पूछ लिया कि तुम किताब पढ़ते भी हो कि सिर्फ ले जाते हो और वापस कर देते हो।

विनीता ने पूछा कि मोदी अंकल, आप कहां से किताबें लाकर पढ़ते थे, इस पर उन्होंने जवाब दिया लाइब्रेरी से। पीएम ने छात्रा शिवानी से पूछा कि मैडम (टीचर) से बार-बार सवाल पूछने पर वह डांटती तो नहीं हैं। इस पर शिवानी से नहीं में जवाब दिया। बाद में शिवानी से कहानी सुनाने को बोला तो उसने चतुर चूहा और बुद्धू बंदर की कहानी सुनाई। 

संवाद के दौरान न पीएम मोदी ने बच्चों से उनकी इच्छा, उनके लक्ष्य भी पूछे। कस्तूरबा विद्यालय की कक्षा आठ की छात्रा रिमझिम से उन्होंने पूछा कि बड़े होकर क्या बनना चाहती हो?  रिमझिम का जवाब था- आईपीएस ऑफिसर। कक्षा आठ की नेहा ने भी आईपीएस ऑफिसर बनने की इच्छा जताई। वहीं मोनी ने पीएम मोदी को बताया कि वह बड़ी होकर डांसर बनना चाहती हैं। प्रधानमंत्री ने इन बच्चों को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ढेर सारी मेहनत करने को कहा। 
 

इतराकर बोला नरउर ‘थैंक यू पीएम मोदी’

- फोटो : amar ujala
हां मैं पगडंडियों पर चलता रहा हमेशा, तड़क भड़क से दूर, ‘सरकारी कोलाहल’ से अंजान था। शुक्रिया पीएम साहब, मुझे उल्लास और उमंग से भरा यह दिन दिखाने के लिए जो मेरी स्मृतियों में हमेशा संजोकर रखा रहेगा।  बच्चों के सवाल जवाब न सिर्फ उनकी तैयारी, उनकी उत्सुकता और उमंग को दर्शा रही थी। उन्हें पीएम मोदी की कही हर एक बात याद है। वे उनकी कही बातों पर अमल करने और आगे बढ़ने की सीख लेकर लौटे हैं।

नरउर गांव में बीते कई दिन से चल रही तैयारियों का शोर सोमवार देर शाम थम गया। इस गांव में पक्की सड़क नहीं थी। लोग भी शहरीपन से घुले मिले नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के बहाने ही सही जहां इस गांव का कायाकल्प हो गया। पीएम मोदी का बर्थडे सेलिब्रेशन यहां हुआ तो गांव की सूरत बदली, रंगत आ गई। शायद यह यहां के बाशिंदों के लिए कभी न भुलाया जाने वाला अविस्मरणीय दिन था, जब छावनी बने गांव में बच्चे कान्वेंट स्कूल के बच्चों से कम नहीं नजर आए।

नरउर गांव में धार्मिक पर्व तो हर साल हुए लेकिन सामूहिक उत्सव शायद पहली बार हुआ। इस उत्सव में बच्चे शान बने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके मेहमान। पूरा गांव इससे उल्लासित था। कई ने कहा, क्या हुआ प्रधानमंत्री से वह नहीं मिल पाए लेकिन उनके बच्चों के बीच आए, ये क्या कम था। 
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अपनों के बेहद करीब पहुंच गए प्रधानमंत्री

- फोटो : amar ujala
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार रात 9: 45 बजे मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पहुंच गए। प्रधानमंत्री को अपने बेहद करीब पाकर यात्री उत्साह के साथ-साथ आश्चर्य से भर गए। मौके का फायदा उठाकर यात्रियों और आम लोगों ने प्रधानमंत्री की तस्वीरें ही नहीं लीं उनके साथ नारे लगाते हुए सेल्फी भी ली।

प्रधानमंत्री ने भी कई बार प्रोटोकाल की बंदिशों को तोड़ते हुए लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री स्टेशन के मुख्य द्वार से अंदर घुसे और पैदल ही प्लेटफार्म नंबर एक पर होते हुए फुटओवर ब्रिज पर पहुंचे और फिर 15 मिनट बाद स्वचालित सीढ़ी से बाहर निकल आए। स्टेशन पर रात आठ बजे से प्रशासनिक अधिकारियों व सुरक्षाकर्मियों की गहमागहमी शुरू हो गई थी।

शिवगंगा और इसके बाद मंडुवाडीह-नई दिल्ली सुपरफास्ट ट्रेन रवाना होने का समय होने के चलते प्लेटफार्म नंबर एक पर काफी भीड़ थी। यात्रियों के आने-जाने पर पाबंदी नही थी। यात्री भी सुरक्षा व्यवस्था को देखते और आगे बढ़ जाते। रात लगभग 9:45 पर वाहनों का एक काफिला स्टेशन पर पहुंचा।

विशेष वाहन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देख प्लेटफार्म पर ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। लोग पीएम के बेहद करीब पहुंच गए। पीएम मोदी को एसपीजी ने घेर रखा था और उसके बाद यात्रियों का घेरा रहा।

यात्रियों के कैमरे, फोटो और वीडियो मोड में आ गए। जयकारे लगने लगे। बीच-बीच में लोगों ने ‘हैप्पी बर्थ डे’ बोला। पीएम मोदी मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। बाद में उनके लौटने से पहले तक तमाम लोग बाहर खड़ी उनकी रेंज रोवर के पास पहुंच गए। इसे देखते हुए गाड़ी के पायदान पर खड़े होकर पीएम मोदी ने लगभग एक मिनट तक लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन लिया।

 
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