सोवा रिग्पा अस्पताल का मॉडल
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अस्पताल के उद्घाटन के बाद यहां पर इलाज के साथ अध्ययन और शोध के काम भी होंगे। तीन हजार साल पुरानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति सोवा रिग्पा में असाध्य बीमारियों के साथ ही कैंसर का भी इलाज प्राचीन चिकित्सा पद्धति से हो सकेगा। दिसंबर 2022 में ही इस अस्पताल के उद्घाटन की तैयारी थी। लेकिन, निर्माण एजेंसी की धीमी रफ्तार के कारण इसे छह महीने आगे बढ़ाना पड़ा।
सोवा रिग्पा अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए सभी सुविधाओं के साथ ही हेलिपैड का निर्माण भी प्रस्तावित है। अस्पताल में कांफ्रेंस समेत विभिन्न गतिविधियों के लिए आधुनिक ऑडिटोरियम तैयार किया गया है। इसमें पांच सौ लोग एक साथ बैठ सकेंगे। इसमें ओपीडी, आईपीडी, छह कंसल्टेंट रूम, ज्योतिष कंसल्टेंट रूम, अत्याधुनिक इमरजेंसी, इंटेंसिव केयर यूनिट, ऑपरेशन थियेटर, फार्मेसी के साथ एक बड़ा वेटिंग हॉल, क्लासरूम, लाइब्रेरी, म्यूजियम, लैब और नक्षत्र शाला भी होगी।
रोवा रिग्पा चिकित्सा पद्धति में मरीजों के इलाज के लिए यहां हिमालयी क्षेत्र से जड़ी बूटियां आती हैं। अरुणाचल प्रदेश के तमांग में करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पांच एकड़ का हर्बल गार्डन है। सोवा रिग्पा पद्धति से इलाज के लिए संस्था औषधियां भी खुद बनाती है। कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने बताया कि वर्तमान में सोवा रिग्पा की ओपीडी पुराने भवन में संचालित हो रही है। रोजाना सौ मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं।
केंद्रीय तिब्बती उच्चतर संस्थान के कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने कहा कि तिब्बती चिकित्सा पद्धति का लाभ जल्द पूर्वांचल समेत प्रदेश की जनता को मिलेगा। अस्पताल के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है और पूरा प्रशासनिक अमला इसमें लगा हुआ है। -
ये भी जानें
- - सोवा रिग्पा का निर्माण मार्च 2019 में शुरू हुआ
- - चार मंजिला भवन के निर्माण में लग गए चार साल
- - 95 करोड़ की लागत से हो रहा है निर्माण
- - 100 बेड का है अस्पताल
- - नौ मंजिला होगा अस्पताल, पहले चरण चार मंजिला भवन तैयार