इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी के काशी में तीन दिन के प्रवास के चलते पूर्वांचल की 50 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने बाजी पलट दी थी। इसके बाद वर्ष 2019 के लोकसभा और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में काशी में पीएम मोदी की मौजूदगी ने भाजपा को बड़ी बढ़त दिलाई थी। इन्हीं समीकरणों को देखते हुए पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र से चुनावी शंखनाद कर आगामी चुनाव के लिए जनता की नब्ज टटोलेंगे। उधर, बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के पूर्व प्रमुख कौशल किशोर मिश्रा का कहना है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की शुरुआत हो चुकी है। पीएम मोदी अपने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर उन्हें वर्ष 2014 के रौ में लाना चाहते हैं। इसके पीछे दो कारण अहम है, एक तो सांसद के रुप में पीएम मोदी ने पिछले चुनाव में साढ़े सात लाख के करीब मत प्राप्त किए थे। इस बार उनका लक्ष्य 10 लाख से ज्यादा मत पाने का है। इसके साथ ही काशी पूरे देश के लिए आस्था की नगरी है, यहां से चुनावी शंखनाद का संदेश कोने कोन में जाएगा।
निकाय चुनाव के कम मत प्रतिशत से संगठन चिंतित
पिछले कुछ महीने पहले हुए निकाय चुनाव में कम मत प्रतिशत भी भाजपा के माथे पर बल डाल रहा है। यहां महज 40 फीसदी के आसपास ही मत पड़े थे। हालांकि कम मत प्रतिशत के बावजूद मेयर डेढ़ लाख के करीब मतों से विजयी हुए और रिकार्ड पार्षदों का जीत मिली। ऐसे में संगठन यह मान रहा है कि यदि कार्यकर्ता सक्रिय होकर उत्साह दिखाएंगे तो काशी के चुनावी माहौल का असर पूरे पूर्वांचल पर पड़ेगा और यहां की हवा पश्चिम तक बहेगी।