इसके अलावा 1020 गांवों का ड्रोन सर्वे पूरा कर लिया गया है और अब यहां के 745 गावों के लाखों घरों का मानचित्र पड़ताल के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भेज दिया गया है। यहां बता दें कि सेवापुरी ब्लॉक के करीब 40 से अधिक गांवों में प्रमाणपत्र बांटा जा चुका है।
योजना के तहत आबादी की जमीन का ड्रोन सर्वे किया गया है। ड्रोन सर्वे की जिम्मेदारी शासन से निजी कंपनी को दी गई है। सर्वे के बाद लेखपाल अपने ग्रामसभा के नक्शा से सत्यापन कर डिटेल रिपोर्ट राजस्व विभाग को मुहैया कराता है।
दरअसल, गांवों में आबादी का रिकार्ड किसी के पास नहीं है। जबकि कृषि भूमि, ग्रामसभा, बंजर आदि भूमि का रिकार्ड तो रेवन्यू विभाग के पास होता है। कृषि भूमि का मालिकाना हक दिखाने के लिए खसरा खतौनी बनाई जाती है, लेकिन आबादी में बने घरों का मालिकाना हक के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं होता। इस योजना के तहत मालिकाना हक मिलने के बाद खतौनी की तर्ज पर घरौनी बनेगी। इसके आधार पर ग्रामीण बैंकों से लोन प्राप्त कर सकेंगे।