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आज मुलायम के गढ़ में हुंकार भरेंगे पीएम मोदी, रणनीति सही मगर इन चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं

Sat, 14 Jul 2018 01:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आजमगढ़
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में आज पीएम मोदी हुंकार भरेंगे।  वीआईपी माने जाने वाले आजमगढ़ जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास के लिए चुन कर भाजपा ने दांव चल दिया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे में ओबीसी, अति पिछड़ों और दलितों को लुभाने के साथ ही सपा-बसपा गठबंधन के मुकाबले अपनी ताकत बढ़ाना चाहेंगे। मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में कमिश्नरी, पीजीआई, हवाई पट्टी, महिला अस्पताल, सर्किट हाउस, रोडवेज भवन, ओवरब्रिज, चीनी मिल की सौगात देकर सपा ने जड़ें मजबूत कर रखी हैं।

पीएम मोदी से जिले के लोगों की उम्मीद कुछ ज्यादा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के थिंक टैंक ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास आजमगढ़ से कराने की बात तय कर लंबी चाल चली है।
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पिछले लोकसभा चुनाव की तर्ज पर इस बार भी शिलान्यास के बहाने ओबीसी, अति पिछड़ों और दलितों को लुभाने की कोशिश है। लेकिन सपा के गढ़ और मुलायम के इस संसदीय क्षेत्र में समाजवादी जड़ों को हिलाना इतना आसान भी नहीं है। कुछ चुनौतियां है जिसे भाजपा को पार पाना होगा। 

वाराणसी-आजमगढ़-गोरखपुर रेलवे लाइन

वाराणसी से आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर तक रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए 1956 में सर्वे हुआ लेकिन फिर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया। 2014 में लालगंज से भाजपा सांसद नीलम सोनकर ने ट्रैक बिछाने के लिए पहल की।

सर्वे में 90 लाख रुपये खर्च हुआ। 500 से अधिक गांवों से ट्रैक गुजरने का दावा और नेशनल हाईवे की तर्ज पर मुआवजा देने की बात कही गई थी। करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। सांसद को उम्मीद थी कि बजट सत्र में ट्रैक बिछाने के लिए धन जारी हो जाएगा लेकिन कुछ नहीं हुआ।

काफी समय से चल रहा विश्वविद्यालय के लिए आंदोलन

यूजीसी के मानक के अनुसार 100 महाविद्यालयों पर एक विश्वविद्यालय होना चाहिए। आजमगढ़ में 250 महाविद्यालय हैं। 1995 में सृजित आजमगढ़ अकेला मंडल मुख्यालय है, जहां विश्वविद्यालय नहीं है।

नतीजतन, उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग खर्च वहन नहीं करने के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं। जौनपुर स्थित पूर्वांचल विवि पर 850 महाविद्यालयों का बोझ है, जिसके कारण भी तमाम समस्याएं आती हैं। आवासीय विवि के साथ ही केंद्रीय विवि को लेकर भी आंदोलन जारी है। 

हवाई पट्टी का विस्तार भी अटका

- फोटो : अमर उजाला
रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत सरकार की ओर से मंदुरी हवाई से घरेलू उड़ान शुरू करने की घोषणा की गई है। कई बार अधिकारियों के दौरे हो चुके हैं। संशोधित मास्टर प्लान भी जारी किया जा चुका है।

इसके बाद नए सिरे से विस्तार और निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार हो चुका है लेकिन अभी तक यहां कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। जनपद से घरेलू उड़ान को लेकर भी स्थानीय लोग काफी आशान्वित हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मंदुरी हवाई पट्टी के विस्तार का शिलान्यास भी इसी समय करें।
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एसटीपी और तमसा के पुनर्जीवन की आस

- फोटो : अमर उजाला
आजमगढ़ में सीवर लाइन और एसटीपी का निर्माण भी जनपदवासियों की प्रमुख मांगों से एक हैं। घटते भूजल स्तर और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर चिंता के कारण ही एक माह तक लोग आंदोलन के रूप में तमसा सफाई महाअभियान में जुटे रहे।

तमसा किनारे पौधरोपण के लिए गड्ढे भी खोदे। अभियान जारी है। दूसरी ओर से 40 साल पहले शुरू हुई सीवर लाइन बिछाने की कवायद अब तक पूरी नहीं हो पाई है। एसटीपी नहीं होने के कारण शहर का गंदा पानी नालों के माध्यम से अभी भी तमसा नदी में गिराया जाता है। 
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