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PM Modi varanasi visit: स्वर्वेद महादेव धाम में पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें, महात्मा गांधी के जिक्र से पानी बचाने तक का संकल्प

Wed, 15 Dec 2021 12:04 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दो दिवसीय वाराणसी दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया। मंगलवार को भाजपा के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के बाद स्वर्वेद महादेव धाम में संतों को संबोधित किया।
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स्वर्वेद महामंदिर धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी दौरे के दूसर दिन स्वर्वेद महामंदिर धाम में विहंगम योग के 98वें वार्षिकोत्सव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी, महाभारत, पानी बचाने, काशी के विकास और आत्मनिर्भर से लेकर कई बातों पर बात की। नीचे पढ़ें प्रधानमंत्री के संबोधन की महत्वपूर्ण बातें...

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन में कहा कि कल काशी ने भव्य विश्वनाथ धाम महादेव के चरणों में अर्पित किया, और आज विहंगम योग संस्थान का ये अद्भुत आयोजन हो रहा है। इस दैवीय भूमि पर ईश्वर अपनी अनेक इच्छाओं की पूर्ति के लिए संतों को ही निमित्त बनाता है।



महाभारत का किया जिक्र
आज गीता जयंती का पुण्य अवसर है। आज के ही दिन कुरुक्षेत्र की युद्ध की भूमि में जब सेनाएं आमने सामने थीं। तो मानवता को योग, आध्यात्म और परमार्थ का परम ज्ञान मिला था।
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योग को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया
सद्गुरु सदाफलदेव ने समाज के जागरण के लिए विहंगम योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यज्ञ किया था। आज वो संकल्प बीज हमारे सामने इतने विशाल वट वृक्ष के रूप में खड़ा है।

महात्मा गांधी का किया जिक्र

स्वर्वेद महामंदिर - फोटो : अमर उजाला
हमारा देश इतना अद्भुत है कि यहां जब भी समय विपरीत होता है, तो कोई न कोई संत-विभूति, समय की धारा को मोड़ने के लिए अवतरित हो जाते हैं। ये भारत ही है, जिसकी आजादी के सबसे बड़े नायक को दुनिया महात्मा बुलाती है।

आजादी की लड़ाई में संतों का योगदान
आज देश आजादी की लड़ाई में अपने गुरुओं, संत और तपस्वियों के योगदान को स्मरण कर रहा है। नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित करा रहा है। मुझे खुशी है कि विहंगम योग संस्थान भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

बनारस के विकास के बारे में बोले

बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान, कला, उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है। आज जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं, तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप भी बनता है। रिंग रोड का काम भी काशी ने रिकॉर्ड समय पर पूरा किया है। बनारस आने वाली कई सड़कें भी अब चौड़ी हो गई हैं। जो लोग सड़क के रास्ते बनारस आते हैं, वो सुविधा से कितना फर्क पड़ा है, इसे अच्छे से समझते हैं।

गोदौलिया में जो सुंदरीकरण का काम हुआ है, वह देखने योग्य है। मंडुवाडीह में बनारस रेलवे स्टेशन भी देखा। इस स्टेशन का भी अब कायाकल्प हो चुका है। पुरातन को समेटे हुए नवीनता को धारण करना, बनारस देश को नई दिशा दे रहा है। बनारस के विकास का सकारात्मक असर यहां आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है। 2014-15 के मुकाबले में 2019-20 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2019-20 कोरोना कालखंड में अकेले बाबतपुर एयरपोर्ट से ही 30 लाख से ज्यादा लोगों का आना-जाना हुआ है।

स्वाधीनता संग्राम के समय सद्गुरु ने हमें स्वदेशी का मंत्र दिया था। आज उसी भाव में देश ने अब ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ शुरू किया है। आज देश के स्थानीय व्यापार-रोजगार, उत्पादों को ताकत दी जा रही है, लोकल को ग्लोबल बनाया जा रहा है।
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गाय केवल दूध का स्त्रोत ही नहीं

हमारा गौ-धन हमारे किसानों के लिए केवल दूध का ही स्रोत न रहे, बल्कि हमारी कोशिश है कि गौवंश प्रगति के अन्य आयामों में भी मदद करे। आज देश गोबरधन योजना के जरिए बायो-फ्यूल और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दे रहा है।

पीम मोदी ने कहा कि आज आप सभी से कुछ संकल्प लेने का आग्रह करना चाहता हूं। ये संकल्प ऐसे होने चाहिए, जिसमें सद्गुरु के संकल्पों की सिद्धि हो और जिसमें देश के मनोरथ भी शामिल हों। ये ऐसे संकल्प हो सकते हैं, जिन्हें अगले दो साल में गति दी जाए, मिलकर पूरा किया जाए।

एक संकल्प ये हो सकता है कि हमें बेटी को पढ़ाना है, उसका स्किल डेवलपमेंट भी करना है। अपने परिवार के साथ-साथ जो लोग समाज में जिम्मेदारी उठा सकते हैं, वो एक दो गरीब बेटियों के स्किल डेवलपमेंट की भी जिम्मेदारी उठाएं। एक और संकल्प हो सकता है पानी बचाने को लेकर। हमें अपनी नदियों, मां गंगा को, सभी जल स्रोतों को स्वच्छ रखना है।
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