लोकसभा चुनाव के बाद दूसरी बार सपा के गढ़ आजमगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन हो रहा है। उनके आगमन से जिले के लोगों को गई सौगातों के मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में सरकार रहते हुए सपा ने जिले में सौगातों की एक बड़ी लकीर खींच दी रखी है।
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सबको उम्मीद है कि जब कोई मुख्यमंत्री इतनी सौगात दे सकता है तो अब प्रधानमंत्री आ रहे हैं और हमारी सभी मांगें पूरी होगी। वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस रैली को जानकारों द्वारा लोकसभा चुनाव का आगाज माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री के रूप में आजमगढ़ आने वाले नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं। बल्कि उनसे पूर्व स्व. इंदिरा गांधी और एचडी देवगौड़ा जनपद में आ चुके हैं। इंदिरा गांधी ने जनपद को सठियांव चीनी मिल और वर्तमान में मऊ जनपद जो उस समय आजमगढ़ का अंग था वहां पर कताई मिल का शिलान्यास किया था।
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जब एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री के रूप में जनपद आए थे तो उन्होंने जनपद को कमिश्नरी का तोहफा दिया था। पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा दिए गए तोहफे को देखते हुए जनपदवासियों की उम्मीदें नरेंद्र मोदी से और बढ़ गई हैं।
सपा के गढ़ में संरक्षक मुलायम सिंह यादव सांसद हैं। उन्होंने प्रदेश में सरकार रहते हुए जनपद में विकास की अनेक परियोजनाओं का शुभारंभ किया है। अब तो प्रधानमंत्री स्वयं आ रहे हैं और उनसे आगेे निकलते हुए जनपद को कई परियोजनाओं की सौगात देंगे।
आजमगढ़ को क्यों कहा जाता है सपा का गढ़
सपा
- फोटो : amar ujala
आजमगढ़ को ऐसे ही समाजवादियों का गढ़ नहीं कहा जाता है। क्योंकि जब देश में मोदी की लहर चल रही थी तब यहां की जनता ने मुलायम सिंह यादव को अपना सांसद चुना। आजमगढ़ संसदीय सीट हमेशा से सत्ता के विरोध में रही है।
हालांकि लालगंज संसदीय सीट पर भाजपा का कमल जरूर खिला। भारतीय हुकूमत के खिलाफ जनमत देने वाला आजमगढ़ आज फिर सत्ता के आईने में दिख रहा है। जनता पार्टी लहर की हवा निकालने वाले आजमगढ़ पर अब मोदी की नजर है। वह इस तिलस्म को तोड़ने की फिराक में हैं।
1978 में यहां हुए उपचुनाव में कांग्रेस की मोहसिना किदवई तब जीती थी जब देश में जनता पार्टी की हुकूमत थी। लहर में जीते राम नरेश यादव के सीएम बनने से आजमगढ़ की सीट रिक्त हुई थी। उपचुनाव के चलते जनता पार्टी की सीट कांग्रेस ने झटक ली थी।
आजमगढ़ लोकसभा सीट की पहचान सत्ता विरोधी रुप में होती जा रही है। मोदी लहर से ही देश और प्रदेशों में भाजपा की सरकारें आज भी कमल की तरह खिलती जा रही है। लेकिन आजमगढ़ की जनता ने मोदी लहर को यहां पनपने नहीं दिया।
मोदी लहर में भी यहां की 10 विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक पर भाजपा को जीत हासिल हुई। लेकिन लोगों का यह मानना है कि यह सीट भी भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव के प्रभाव के कारण उनके पुत्र को जीत के रूप में मिली।
इससे पूर्व अगर देखें तो जनपद में कभी सपा तो कभी बसपा को ज्यादा सीटें मिलती रही हैं। इस बार दोनों के साथ आने से परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल 14 जुलाई की रैली के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तिलस्म को तोड़ने की पूरी कोशिश करेंगे।
आशंका से नेताओं की नींद उड़ी
पीएम मोदी
सपा के गढ़ में पैठ बनाने की मंशा से आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ जुटने की आशंका से नेताओं की नींद उड़ी हुई है। उन्हें इस बात का डर सता रहा कि कहीं कार्यक्रम को फ्लाप साबित करने के लिए विपक्षीगण जगह-जगह सड़क जाम कर मार्गों को अवरुद्ध न कर दें।
क्योंकि पूर्व में इस प्रकार का षड्यंत्र रचा जा चुका है। इसी बात को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं को डर है। इसीलिए मार्ग पर यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस के विशेष वाहनों को लगाया गया है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौकन्ना रहने का निर्देश दिया गया है।
जिले की राजनीतिक गतिविधियों पर गौर करें तो यहां कभी सपा तो कभी बसपा का बोलबाला रहा है। भाजपा का प्रदर्शन यहां बहुत ही खराब रहा। जिले के सदर और लालगंज लोकसभा सीट पर प्राय: सपा और बसपा का कब्जा रहा।
वर्ष 2008-09 के लोकसभा चुनाव में सदर सीट से जहां रमाकांत यादव ने चुनाव जीतकर भाजपा के लिए इतिहास रचा था, तो वर्ष 2014 के चुनाव में रमाकांत यह सीट हार गए। जबकि लालगंज लोकसभा से वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के लिए नीलम सोनकर ने सीटकर जीतकर इतिहास रचा।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले के दस सीटों में एक फूलपुर-पवई भाजपा के खेमे में गई। शेष नौ सीटों पर सपा और बसपा का कब्जा हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर में भी उनके पार्टी के धुरंधर बहुत कम वोटों के अंतर से चित हुए।
ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यदि थोड़ी सी भी मेहनत कर दी गई तो वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में यहां की दोनों सीटें पार्टी के पाले में आ जाएंगी। इसका प्रभाव आसपास के जिलों की सीट पर भी पड़ेगा। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के लोग भीड़ जुटाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए हैं।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की सौगात देने प्रधानमंत्री शनिवार की दोपहर 2.20 जिले में होंगे। इस दौरान सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों का जमावड़ा लगेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लखनऊ से गाजीपुर तक बनने वाले 354 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे जिसका 99 किमी का हिस्सा जनपद में पड़ रहा है का शिलान्यास जनपद के मंदुरी हवाई पट्टी पर करेंगे। प्रधानमंत्री 13.45 बजे वाराणसी एयरपोर्ट से हेलीकाप्टर से चलकर मंदुरी हेलीपैड 14.20 बजे पहुंचेंगे।
14.30 बजे से 15.30 बजे तक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास और जनसभा होगी। इसके बाद वो वाराणसी के लिए रवाना हो जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संभवत: राज्यपाल राम नाइक भी उनके साथ आएंगे। सुबह से अधिकारियों ने मंदुरी हवाई पट्टी पर डेरा डाल लिया था।
इनकी भी रहेगी उपस्थिति
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सूबे के विभिन्न मंत्रियों का कार्यक्रम का पहुंचना जारी है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कार्यक्रम भी आ गया है।
इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, दारा सिंह चौहान, सूर्य प्रताप शाही, ओम प्रकाश राजभर, राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी, सुरेश पासी, जय प्रकाश निसाद का कार्यक्रम भी पहुंच चुका है। इसके अलावा पूर्वांचल के सभी सांसद, विधायक और पार्टी के पदाधिकारियों के आने की सूचा है।