फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: हिंदी साहित्य और नागरी लिपि के संरक्षण और प्रचार का लिया संकल्प

विज्ञापन
विज्ञापन
नागरी प्रचारिणी सभा में बृहस्पतिवार को तुलसी तिथि और प्रेमचंद जयंती मनाई गई। हिंदी साहित्य के दो महान स्तंभ गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शुभारंभ सभा के सहायक मंत्री रामअवध मिश्र ने पुष्पांजलि से किया। इस दौरान सभी को हिंदी साहित्य और नागरी लिपि के संरक्षण और प्रचार में योगदान देने का संकल्प दिलाया गया।
विज्ञापन

सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि इस साल प्रेमचंद जयंती और गोस्वामी तुलसीदास जयंती एक साथ पड़ी है। प्रेमचंद ने हंस के 133वें अंक के संपादकीय में लिखा है कि गोस्वामी तुलसीदास की श्रावण शुक्ल सप्तमी को निधन-तिथि होने के कारण इसे जयंती के बजाय पुण्य-स्मृति-तिथि या तुलसी-तिथि कहना उचित है। व्योमेश शुक्ल ने सभा से प्रेमचंद के जुड़े प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक दौर में प्रेमचंद का छापाखाना विश्वेश्वरगंज स्थित सभा-परिसर के पड़ोस में था। वे रोज अपने प्रेस में दोपहर के खाने की छुट्टी होने पर सभा आ जाते थे। विश्वप्रसिद्ध कला संग्रहालय भारत कला भवन सभा के परिसर में स्थित था। संग्रहालय के संस्थापक राय कृष्णदास भी यहीं मिल जाते थे। दोनों मूर्धन्यों की बैठकी जम जाती थी। कभी-कभी जयशंकर प्रसाद भी बैठकी में शामिल हो जाते थे। इस दौरान सहायक मंत्री कालिंदी शुक्ला, ऋचा आत्रेय, आरुणिचंद्र सिन्हा, सभानारायण मिश्र, इंद्रजीत, अमलेश पांडेय, विनोद शंकर तिवारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें