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Varanasi: प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट असंवैधानिक, एडवोकेट विष्णु शंकर जैन बोले- गलती को अब सही करने का समय

Sun, 29 Jan 2023 07:09 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की वैधता पर सवाल उठाए हैं। वो रविवार को वाराणसी में एक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। 
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एडवोकेट विष्णु शंकर जैन को सम्मानित करते अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट ( पूजा स्थल कानून) की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए मुगल काल में तोड़ दिए गए उपासना स्थलों को प्राप्त करने के कानूनी रास्तों को बंद कर दिया गया।
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वहीं वक्फ एक्ट बनाकर कथित अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को किसी भी जमीन को वक्फ सम्पत्ति घोषित करने का अधिकार दे दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन रविवार को वाराणसी के अस्सी स्थित एक होटल भाजपा विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।

इसमें उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मुगलों ने जो संपत्ति तलवार से हासिल की थी, उसे अब कोर्ट अपनी कलम से सही करे। पहले हुई गलती को अब सही करने का समय आ गया है। भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के तत्वाधान में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट यानी उपासना स्थल अधिनियम 1991 पर एक गोष्ठी का आयोजन हुआ।
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कार्यक्रम में नित्यानंद राय ने कहा कि उपासना स्थल अधिनियम 1991 विभेदकारी और असंवैधानिक है। उसे रद्द किया जाय। सभा के बाद निकले निष्कर्ष को भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भारत सरकार के पास भेजा जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता रोहनिया के पूर्व विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने किया। सभा का संचालन बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय राय ने किया। 
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प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट एक नजर में

1991 में लागू किया गया यह प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। यह कानून तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार 1991 में लेकर आई थी। यह कानून तब आया जब बाबरी मस्जिद और अयोध्या का मुद्दा बेहद गर्म था। इस एक्ट की अलग-अलग कई धाराएं और उसकी व्याख्या है। 
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