कार्यक्रम में नित्यानंद राय ने कहा कि उपासना स्थल अधिनियम 1991 विभेदकारी और असंवैधानिक है। उसे रद्द किया जाय। सभा के बाद निकले निष्कर्ष को भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भारत सरकार के पास भेजा जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता रोहनिया के पूर्व विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने किया। सभा का संचालन बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय राय ने किया।
1991 में लागू किया गया यह प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। यह कानून तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार 1991 में लेकर आई थी। यह कानून तब आया जब बाबरी मस्जिद और अयोध्या का मुद्दा बेहद गर्म था। इस एक्ट की अलग-अलग कई धाराएं और उसकी व्याख्या है।