ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री पीयूष गोयल गंभीर हैं। रविवार को मुगलसराय का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किए जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में रेलमंत्री ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि बहुत जल्द ट्रेनें समय पर चलने लगेंगी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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रेलवे के बाकले मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जुटे भाजपा के दिग्गज
- फोटो : अमर उजाला
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश के संसाधनों पर सबसे पहला हक वंचितों का है। रेलवे भी इसी नीति पर काम कर रही है। रेलवे उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष साढ़े पांच हजार करोड़ का निवेश कर रहा है। पहले यहां सालाना सिर्फ 1100 करोड़ रुपये का निवेश होता था।
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रेलवे के बाकले मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जुटे भाजपा के दिग्गज
- फोटो : अमर उजाला
अक्तूबर, 2019 तक फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण पूरा होने के बाद ट्रेनों की आवाजाही में देरी की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। गोयल रविवार को रेलवे के चंदौली में पीडीडीयू नगर के बाकले मैदान पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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रेल मंत्री ने कहा कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनीतिक संत थे। उनके शहादत स्थल मुगलसराय का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर रेलवे ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है।
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केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूश गोयल
- फोटो : PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में रेलवे की कई विकास योजनाओं का लोकार्पण इस दिशा में अहम कड़ी है। इसके पूर्व रेल राज्यमंत्री और संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने कहा कि रेलवे देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। पूर्वांचल के विकास में भी रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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ट्रेन की गार्ड सुधा कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वी उत्तर प्रदेश में आम लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं, कनेक्टिविटी बढ़ गई है। मोदी सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक ध्यान रखा गया है। रेल मंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेलवे द्वारा नई दृष्टि देने के साथ-साथ गरीबों के कल्याण के लिए सोचने की जानकारी देते हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नामकरण को सही ठहराया।
रेलवे के बाकले मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जुटे भाजपा के दिग्गज
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पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और विचारों में रेलवे का असर दिखता है। इसी तरह प्रधानमंत्री मोदी का बचपन भी रेलवे स्टेशन पर गुजरा। इस कारण ही दोनों विभूतियों ने देश के नागरिकों के दु:ख-दर्द को नजदीक से देखा, उनकी समस्याओं को समझा और सबकी परेशानियों के समाधान के बारे में सोचा।