मध्याह्नव्यापिनी तिथि में होते हैं श्राद्ध कर्म
पितरों का श्राद्ध श्रद्धा भाव से आश्विन कृष्ण पक्ष में किया जाता है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख- शांति, वंशवृद्धि और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। ध्यान रहे कि श्राद्ध के सभी कर्म अपराह्न काल यानी मध्याह्ननव्यापिनी तिथि में किए जाते हैं। उत्तर और दक्षिणी भारतीय लोगों के श्राद्ध की विधि समान और समान दिन ही होती है।
श्राद्ध की प्रमुख तिथियां
तृतीया का श्राद्ध - 20 सितंबर, चतुर्थी - 21 सितंबर, पंचमी- 22 सितंबर, षष्ठी - 23 सितंबर, सप्तमी - 24 सितंबर, अष्टमी - 25 सितंबर, नवमी - 26 सितंबर, दशमी - 27 सितंबर, एकादशी - 28 सितंबर, द्वादशी - 29 सितंबर, त्रयोदशी - 30 सितंबर, चतुर्दशी - 1 अक्तूबर और सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध - 2 अक्तूबर को होगा।