वाराणसी में पितृ पक्ष के अंतिम दिन पिंडदान करते लोग
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सर्वपितृ अमावस्या पर मोक्ष नगरी काशी के पिशाचमोचन कुंड और गंगा तट पर ढाई लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। वहीं 15 दिनों में पितरों को 84 लाख योनियों से मुक्ति दिलाने के लिए 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने श्राद्ध व तर्पण किया। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पहल पर काशी के शंकराचार्य घाट पर 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान मरने वाले 20 लोगों की आत्मा की मुक्ति के लिए भी श्राद्ध व तर्पण का अनुष्ठान पूर्ण हुआ। साथ ही कोरोना काल में मरने वाले एक करोड़ लोगों की सद्गति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध व तर्पण हुआ।
शंकराचार्य के मार्गदर्शन में आचार्य पं. अवधराम पांडेय के आचार्यत्व में त्रिपिंडी श्राद्ध व तर्पण हुआ। हरियाणा से श्रीविद्यामठ में आए सुरेश मानचंदा ने शंकराचार्य से अनुरोध किया कि भारत पाकिस्तान विभाजन के समय मारे गए लोगों का उस समय अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाया था। उन्होंने शंकराचार्य से निवेदन किया कि उन सभी की सद्गति के लिए भी श्राद्ध तर्पण किया जाए।
सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार को वाराणसी पुलिस ने भी शहर में मिले 202 लावारिस मृतकों का पिंडदान किया। काशी मोक्षदायिनी समिति और पुलिस के सहयोग से इस साल 202 शव का अंतिम संस्कार किया गया था।