जीआई उत्पाद में शामिल गुलाबी मीनाकारी का रंग और चटख हो गया है। अक्षय तृतीया पर गुलाबी मीनाकारी को एक नया बाजार मिला है। सोने के दामों में उछाल की वजह से कुंदन गुलाबी मीनाकारी के आभूषणों की मांग बढ़ गई है। देश और विदेशों से अक्षय तृतीया पर गुलाबी मीनाकारी के ऑर्डर में मिले हैं। हस्तशिल्पियों के अनुसार अक्षय तृतीया पर लगभग एक करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिले हैं।
जीआई विशेषज्ञ रजनीकांत ने बताया कि गुलाबी मीनाकारी को बनाने में सोने और चांदी का इस्तेमाल होता है, इसलिए लोग शुभ मानकर इस प्राचीन हस्तकला को अक्षय तृतीया में खूब पसंद कर रहे हैं। बनारसी गुलाबी मीनाकारी का सालाना व्यवसाय लगभग 12 से 15 करोड़ से अधिक का है। इससे 250 से 300 लोग जुड़े हैं।
इसमें 30 फीसदी महिलाएं हैं। नेशनल अवाॅर्डी कुंज बिहारी ने बताया कि अक्षय तृतीया पर कुंदन गुलाबी मीनाकारी के कई उत्पादों के ऑर्डर देश के अलावा विदेशों से आए हैं। इसमें ज्वेलरी में हार, झुमके, अंगूठी, रिंग, पायल आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा लोग शादियों में गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट के लिए भी इस उत्पाद को पसंद कर रहे हैं। कॉरपोरेट गिफ्टिंग में भी गुलाबी मीनाकारी की मांग बढ़ गई है।
गुलाबी मीनाकारी का काम गायघाट, कालभैरव, पक्का महल आदि क्षेत्रों की गलियों में अधिक होता है। हस्तशिल्प रमेश विश्वकर्मा, तरुण, जया सिंह, पूनम, मीना देवी बलराम दास, श्याम दास, अमर नाथ वर्मा, अरुण वर्मा ने बताया कि सरकार की योजनाओं से इस उत्पाद को बड़ा बाजार मिला है।