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घाटों पर आसान नहीं होगा पिंडदान

Fri, 09 Sep 2016 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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शिव गया के रूप में विख्यात काशी में पूर्वजों के स्मृति में तर्पण-अर्पण के लिए पितृपक्ष में पड़ोसी देश नेपाल समेत देश के कोने से उमड़ने वाले वंशजों को जबरदस्त दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है। वजह है घाटों से गाद हटनी तो दूर अभी कई जगह पानी भरा हुआ है। ऐसे में अगर हफ्ते भर में अगर पानी उतर भी गया तो गाद की सफाई करा पाना संभव नहीं दिख रहा है।
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अकेले मणिकर्णिका घाट पर एक लाख से अधिक वंशजों के पिंडदान करने के लिए पहुंचने का अनुमान है लेकिन वहां खड़ा होने की भी जगह नहीं मिलेगी। तीर्थ पुरोहित हालात को देखते हुए गलियों और घरों के बरामदों में पिंडदान कराने की तैयारी में हैं। दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद घाट, अहिल्याबाई घाट पर सिल्ट के ढेर पितृपक्ष के दौरान पुरोहितों और वंशजों के लिए मुसीबत के सबब बन सकते हैं। पितृपक्ष के श्राद्ध 16 सितंबर को महालया से शुरू होंगे।  


गुरुवार को मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी तीर्थ पर मढ़ियों से लेकर मंदिरों और फर्शों पर पांच फीट तक पानी लगा रहा। नेपाली लाल मोहरिया पंडा प्रधान तीर्थ पुरोहित पं. रविशंकर द्विवेदी ने बताया कि पांच पंप लगाकर कुछ दिन पहले गलियों की गाद धोई जा रही थी लेकिन अब वह भी ठप है। उनका कहना है कि अगर तेज रफ्तार से भी पानी घटा तो भी अब गाद नहीं हट पाएगी। इतना ही नहीं, इस घाट पर चक्रपुष्करणी तीर्थ के पूर्वी हिस्से की छत पर वर्ष भर पहले से वीडीए की ओर से तोड़ कर गिराया गया सिंधिया गेस्ट हाउस का मलबा भरा है। इसलिए वहां भी पिंड दान के लिए जगह नहीं मिलेगी। तीर्थ पुरोहित मुकेश महाराज ने बताया कि घाटों पर जगह न होने की दशा में गलियों, घरों के बरामदों और छतों पर पिंडदान कराया जाएगा।
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दशाश्वमेध घाट की कुछ सीढ़ियां ही अभी खाली हुई हैं। स्नानार्थियों को डुबकी लगाने में दिक्कतें हो रही हैं। राजेंद्र प्रसाद घाट पर भी यही स्थिति है। अहिल्याबाई घाट, दरभंगा घाट अभी भी डूबा हुआ है। वहां उतर कर पिंडदान करने के लिए जगह नहीं है।
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