शायरों और उलेमाओं ने हजरत अली की जिंदगी पर रोशनी डाली।
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दुर्रे-नजफ अवॉर्ड पहली बार मरणोपरांत फरमान हैदर को दिया गया, जो शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता रहे और शिया समुदाय के प्रचार-प्रसार में अहम योगदान दिया। यह सम्मान उनके पुत्र सलमान हैदर ने ग्रहण किया। इसके अलावा बाबुल-इल्म अवॉर्ड नीट पास करने वाली फराह फातिमा और मरियम फातिमा को, शायरे अली अवॉर्ड शाद शिवानी को, विलायते अली अवॉर्ड अंजुमन जाफरिया को और खुदामे अली अवॉर्ड शौजफ हुसैन को दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शफीक हैदर ने किया और शुक्रिया अदा मौलाना ज़मीरुल हसन रिज़वी ने किया। इस मौके पर मौलाना तहज़ीबुल हसन, मौलाना जुहैर जाफर, मौलाना जावेद नैजफी, मौलाना तौसीफ अली, मौलाना अली इमाम, मौलाना सैयद हैदर अब्बास, अब्बास मुर्तुजा शम्सी, जीशान हैदर, अफाक हैदर, सफक रिज़वी, शकील अहमद आदि मौजूद रहे।
उधर, इमामे जुमा मौलाना सैय्यद जफर हुसैनी की देखरेख में ईमानिया अरबी कॉलेज, मुकीमगंज में सजी महफिल में शायरों ने कलाम पेश किए। दिल को छू लेने वाले कलाम पर शायरों को खूब वाहवाही मिली। कार्यक्रम का संचालन मौलाना सैय्यद अमीन हैदर ने किया। दालमंडी, दोषीपुरा, अर्दली बाजार, शिवाला, बजरडीहा सहित शिया बाहुल्य क्षेत्रों में भी महफिलें सजाई गईं।