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बनारस में जियारत: हजरत अली व हुसैन की गूंजी सदाएं...सजी महफिलें, विलादत पर उठे जुलूस; शिया घरों में फातिहा

Sun, 04 Jan 2026 06:05 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: हज़रत अली की विलादत पर शायरों और उलेमाओं ने उनकी जिंदगी पर रोशनी डाली। दरगाहे फातमान में उनके रौज़े पर गुलपोशी और जियारत के लिए दिनभर हुजूम उमड़ा रहा।
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जुलूस में शामिल अकीदतमं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हज़रत अली की विलादत पर शनिवार को चहुंओर जुलूस निकाला गया। मौला अली की सदाएं बुलंद होती रहीं। शिया घरों में खुशियों का माहौल रहा। 13 रजब के मौके पर कुंडा और पकवानों पर फातिहा हुई और महफिलें सजाई गईं।

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हजरत अली की विलादत पर सुबह दोषीपुरा सहित विभिन्न इलाकों से जुलूस निकलकर टाउनहाल पहुंचा। वहां से हज़रत अली समिति व अंजुमन हैदरी की अगुवाई में मौला अली की सदाएं बुलंद करते हुए अकीदतमंदों ने जुलूस निकाला, जो नीचीबाग, चौक, दालमंडी, नई सड़क और शेख सलीम फाटक होते हुए काली महाल पहुंचा। काली महाल पहुंचने पर रिज़वी होम की अगुवाई में 50 किलो का केक काटा गया। इसके बाद जुलूस लल्लपुरा होकर दरगाहे फातमान पहुंचा, जहां सेमिनार और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ।

धर्मगुरुओं ने मौला अली की जिंदगी पर रोशनी डाली। मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि हज़रत अली के अद्ल-इंसाफ की दुनिया में कोई दूसरी नज़ीर नहीं मिलती। ज़रूरत है कि हुक्मरान उनके किए फैसलों से सबक लें, ताकि दुनिया से ज़ुल्म का खात्मा हो और अद्ल-इंसाफ कायम हो। काशी विद्यापीठ के प्रो. मुहम्मद आरिफ और केंद्रीय तिब्बत शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. रमेशचंद नेगी ने मौला अली द्वारा इंसानियत के लिए किए गए कार्यों की सराहना की और कहा कि उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने की जरूरत है।

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चहुंओर जुलूस निकाला गया

शायरों और उलेमाओं ने हजरत अली की जिंदगी पर रोशनी डाली। - फोटो : अमर उजाला
दुर्रे-नजफ अवॉर्ड पहली बार मरणोपरांत फरमान हैदर को दिया गया, जो शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता रहे और शिया समुदाय के प्रचार-प्रसार में अहम योगदान दिया। यह सम्मान उनके पुत्र सलमान हैदर ने ग्रहण किया। इसके अलावा बाबुल-इल्म अवॉर्ड नीट पास करने वाली फराह फातिमा और मरियम फातिमा को, शायरे अली अवॉर्ड शाद शिवानी को, विलायते अली अवॉर्ड अंजुमन जाफरिया को और खुदामे अली अवॉर्ड शौजफ हुसैन को दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शफीक हैदर ने किया और शुक्रिया अदा मौलाना ज़मीरुल हसन रिज़वी ने किया। इस मौके पर मौलाना तहज़ीबुल हसन, मौलाना जुहैर जाफर, मौलाना जावेद नैजफी, मौलाना तौसीफ अली, मौलाना अली इमाम, मौलाना सैयद हैदर अब्बास, अब्बास मुर्तुजा शम्सी, जीशान हैदर, अफाक हैदर, सफक रिज़वी, शकील अहमद आदि मौजूद रहे।

उधर, इमामे जुमा मौलाना सैय्यद जफर हुसैनी की देखरेख में ईमानिया अरबी कॉलेज, मुकीमगंज में सजी महफिल में शायरों ने कलाम पेश किए। दिल को छू लेने वाले कलाम पर शायरों को खूब वाहवाही मिली। कार्यक्रम का संचालन मौलाना सैय्यद अमीन हैदर ने किया। दालमंडी, दोषीपुरा, अर्दली बाजार, शिवाला, बजरडीहा सहित शिया बाहुल्य क्षेत्रों में भी महफिलें सजाई गईं।
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