बनारस के निकाय चुनाव में इस बार पीएचडी से अंगूठा टेक तक रहनुमाई के लिए मैदान में खम ठोक रहे हैं। सियासत की पाठशाला में कोई अपने तजुर्बे के दम पर मैदान मारने की जुगत में है तो कोई अपनी पढ़ाई-लिखाई का हवाला देकर अपनी जीत पुख्ता करने में जुटा है।
शहर के 90 वार्डों से किस्मत आजमा रहे 809 प्रत्याशियों में तकरीबन 12 फीसदी उम्मीदवार उच्चशिक्षित हैं जबकि छह फीसदी प्रत्याशी ऐसे हैं, जो निरक्षर हैं। जनता की रहनुमाई के लिए एक से बढ़कर एक दावों-वादों के साथ कोई किसी से कम नहीं।
चुनावी इम्तहान पास करने के लिए मतदाताओं के घर दस्तक जारी है। एक-एक वोट के लिए एड़ी-चोटी का जोर एक कर दिया गया है। प्रत्याशियों ने नामांकन के दौरान दाखिल किए गए अपने शपथ पत्र में शैक्षिक योग्यता का उल्लेख किया है।
नगर निगम के 90 वार्डों के पार्षद प्रत्याशियों पर नजर डालें तो सबसे अधिक लगभग 60 प्रतिशत प्रत्याशी ऐसे हैं, जिनकी शिक्षा प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल या फिर इंटरमीडिएट है। 58 प्रत्याशी ऐसे हैं, जो परास्नातक हैं।
इनमें आधा दर्जन प्रत्याशियों के पास पीएचडी की भी उपाधि है। 80 प्रत्याशी स्नातक या फिर डिप्लोमाधारी हैं। कुछ प्रत्याशी ऐसे हैं जिन्होंने खुद को साक्षर बताया है।
करीब छह फीसदी प्रत्याशी ऐसे हैं जो अंगूठा टेक यानी निरक्षर हैं। जो ज्यादा पढ़ा-लिखा है वह अपनी शैक्षिक योग्यता का भी प्रचार-प्रसार कर रहा है। वहीं कई ऐसे हैं, जिनका कहना है कि पार्षद बनने के लिए जनता की सेवा का जज्बा ही काफी है।