नहीं शामिल हो रहे हैं परिजन
मोक्ष की नगरी काशी में अब चार कंधे भी बिना पैसों के उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण मौत होने पर परिजन भी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। स्थितियां ऐसी बन जा रही हैं कि शव के साथ एक या दो आदमी ही घाट पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में शव को सड़क से लेकर चिता तक पहुंचाने के लिए चार कंधों का दाम 16 हजार रुपये तक लग रहा है। कुछ युवाओं की टोली पैसों के लिए जान हथेली पर रखकर इस काम को अंजाम दे रही है। एक तरफ जरूरत है तो दूसरी तरफ विवशता।
महामारी काल को कुछ लोगों ने आपदा में अवसर में बदल दिया है। धर्म की नगरी में इस तरह की स्थितियां बेहद शर्मिंदा करने वाली हैं। वर्तमान हालात की विवशताओं को समझा जा सकता है। - प्रो. रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री काशी विद्वत परिषद
मोक्ष परंपरा वाला शहर महामारी की चपेट में है। अंतिम यात्रा में चार कंधों के इंतजाम के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। महामारी ऐसी है कि अपने भी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो रहे हैं। शासन प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए। - महंत बालक दास, पातालपुरी मठ
केस एक
विनायका निवासी मनीष अपनी मां का शव लेकर हरिश्चंद्र घाट पर पहुंचे तो उनके साथ एक ही रिश्तेदार था। ऐसे में शव को घाट तक ले जाने के लिए चार कंधों की जरूरत थी। घाट पर मौजूद युवक ने पूछा कि आप दो लोग हैं और दो लोगों की और जरूरत पड़ेगी। साढ़े तीन हजार प्रति व्यक्ति के हिसाब से मोलभाव तय हुआ और उसके बाद मनीष ने अपनी माता का अंतिम संस्कार किया।
केस दो
अलईपुरा निवासी संजय प्रसाद अपने रिश्तेदार का शव लेकर वाहन से हरिश्चंद्र घाट पर पहुंचे। दो लोगों के होने के कारण शव को घाट तक ले जाने की समस्या सामने आई तो घाट पर मौजूद युवकों ने कहा कि परेशान ना हों हम कंधा दे देंगे। संजय ने कहा कि कोरोना से मौत हुई तो युवक ने कहा कि कोई बात नहीं है आप बस आठ हजार रुपये दे दिजीएगा और बाकी छह हजार अंतिम संस्कार की पूरी क्रिया के लिए।