दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी आ रहे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (पीबीजी) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सिक्योरिटी सेल के अभेद्य सुरक्षा घेरे में रहेंगे। दशाश्वमेध घाट पर राष्ट्रपति की पूजा-अर्चना के दौरान गंगा में पीएसी बाढ़ राहत दल और एनडीआरएफ के जवानों के साथ ही नेवी के गोताखोर भी तैनात रहेंगे। इसके अलावा केंद्रीय खुफिया एजेंसियां, एनएसजी व एटीएस के कमांडो, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के जवान बाहरी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे। साथ ही, राष्ट्रपति के शहर प्रवास के दौरान लखनऊ स्थित डीजीपी कार्यालय से सुरक्षा व्यवस्था की सीधी निगरानी की जाएगी।
राष्ट्रपति के शहर आगमन से छह दिन पहले सात मई की दोपहर बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हुए धमाके से केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां काफी सतर्कता बरत रही हैं। तय किया गया है कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर जिला पुलिस और प्रशासन द्वारा सत्यापित लोग ही प्रवेश पा सकेंगे। कार्यक्रम स्थल और राष्ट्रपति के काफिले के रूट की ऊंची इमारतों पर अत्याधुनिक शस्त्रों से लैस पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात रहेंगे। वहीं उनके दशाश्वमेध घाट पहुंचने से दो घंटे पहले से ही राजघाट से हरिश्चंद्र घाट तक गंगा में नौकायन पर प्रतिबंध रहेगा। जबकि 12 मई की सुबह से राष्ट्रपति के लौटने तक शहर में भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। इस संबंध में सोमवार को बीएचयू स्थित स्वतंत्रता भवन और बाबतपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हुई।
राष्ट्रपति की सुरक्षा में वाराणसी पुलिस के अलावा छह एसपी, 10 एडिशनल एसपी, 25 डिप्टी एसपी, 35 थानाध्यक्ष, 225 सब इंस्पेक्टर, 350 हेड कांस्टेबल, 1350 कांस्टेबल, 500 होमगार्ड, सात महिला सब इंस्पेक्टर, 60 महिला कांस्टेबल, चार कंपनी पीएसी, एक कंपनी पीएसी बाढ़ राहत दल और सीआरपीएफ, सीआईएसएफ सहित अन्य पैरामिलिट्री फोर्स के जवान लगाए जाएंगे। वहीं, दशाश्वमेध घाट और बीएचयू स्थित स्वतंत्रता भवन के दो दर्जन से ज्यादा डोर और हैंड मेटल डिटेक्टर लेकर सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।
वहीं, प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड यानी राष्ट्रपति के अंगरक्षकों का बनारस से विशेष नाता है। प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड के नाम से विख्यात इस रेजिमेंट की स्थापना 1773 में तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने बनारस में की थी। तब इसका नाम रखा गया था द गार्ड ऑफ मुगल्स। वर्ष 1784 में इसे द गवर्नर जनरल्स बॉडीगार्ड, 1858 में द वाइज रॉयस बॉडीगार्ड, 1944 में 44वीं डिविजनल रिकोनॉयसंस स्क्वाड्रन जीजीबीजी और 1947 में इसका नाम फिर द गवर्नर जनरल्स बॉडीगार्ड रखा गया। 1950 में जब देश को गणराज्य घोषित किया गया तो इस रेजिमेंट को प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड नाम दिया गया।