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UP: कागजों में चलने वाली फर्मों के खाते में भुगतान मेटेरियल सप्लाई के नाम पर टैक्स चोरी, जांच में गड़बड़ी

Thu, 10 Apr 2025 12:25 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अजीत पाठक, अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
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ग्राम प्रधान द्वारा कराए जा रहे कार्य की सामग्री का बनाया गया पर्चा। - फोटो : अमर उजाला
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पंदह (बलिया)। ग्राम पंचायतों में सीमेंट, बालू और सरिया सहित अन्य मेटेरियल की सप्लाई करने वाली फर्में जीएसटी चोरी कर रही हैं। जिन फर्मों के नाम और बिल पर ग्राम पंचायतों से लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, उनमें से ज्यादातर कागजों में दर्ज हैं। इसका खुलासा उपायुक्त राज्य कर की जांच में हुआ है।
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जांच से पता चला कि ग्रामीण विकास के नाम पर पंचायती राज और ग्राम विकास विभाग में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। ग्राम प्रधान, सचिव, ब्लॉक व जिला स्तरीय अधिकारियों की सांठगांठ सामने आ गई है। आवासीय भवनों से संचालित फर्मों के एनवॉयस पर सेंट्रल और स्टेट जीएसटी का कोई जिक्र तक नहीं किया जा रहा। कमीशन के चक्कर में ग्राम पंचायतें रसीद बिल पर ही भुगतान कर दे रही हैं।

केस 1: ग्राम पंचायत गढ़मलपुर में मेटेरियल सप्लाई करने के एवज में 10 मार्च 2025 को 1,79,902 रुपये का भुगतान जय गुरुदेव कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स सुखपुरा (स्टेडियम रोड) को दिया गया। मामले की जांच हुई तो फर्म का पता आवासीय निकला।

जांच अधिकारी (उपायुक्त राज्य कर एवं नोडल आईजीआरएस) को व्यापार स्थल पर कोई व्यापारिक गतिविधि एवं स्टॉक नहीं मिला। यही नहीं, बिल में फर्म की ओर से माल की सप्लाई 1,79,902 रुपये के सापेक्ष कोई कर प्रदर्शित नहीं किया गया। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि फर्म स्वामी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोई भी बिक्री, कर प्रदर्शित या जमा नहीं किया है।

केस 2: तिरूपति बिल्डिंग मेटेरियल पूर के पते पर जांच अधिकारी पहुंचे तो व्यापार स्थल पर व्यापारिक गतिविधि मिली, लेकिन ग्राम पंचायत गढ़मलपुर में सप्लाई किए गए मेटेरियल से संबंधित सेल, पर्चेज, एनवॉयस, बैंक स्टेटमेंट नहीं दिखाया गया। न ही भुगतान प्राप्ति के संबंध में स्पष्ट जानकारी ही दी गई। एनवॉयस पर टैक्स के कॉलम खाली मिले।

केस 3: अंजनी इंटरप्राइजेज छिब्बी अघोषित स्थल से व्यापारिक गतिविधि संचालित करती पाई गई। ग्राम पंचायत को दिए गए एनवॉयस में टैक्स प्रदर्शित नहीं किया गया था, जबकि सीमेंट और लाल बालू की आपूर्ति पर जीएसटी देना होता है।

जांच के दौरान जनवरी 2025 में केवल बीटूबी की सप्लाई में भी कर चोरी का मामला सामने आया। 54,073 की देनदारी को जीएसटीआर एक में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन जीएसटीआर 3बी दाखिल नहीं किया गया। इससे पहले भी कर चोरी के साक्ष्य जांच अधिकारी को मिले थे।

केस 4: शक्ति ट्रेडर्स छिब्बी की जांच भी हुई। इससे पता चला कि गढ़मलपुर के प्रधान और सचिव को जारी सेल एनवॉयस में प्रदर्शित कॉलम में टैक्स की दर अंकित नहीं की गई थी। प्राप्त भुगतान में भी टैक्स को शामिल नहीं किया गया था। फर्म की ओर से लगातार ई-वे बिल जारी करने एवं उसे निरस्त करने का मामला भी प्रकाश में आया। ग्राम पंचायत से प्राप्त 72,182.11 रुपये के भुगतान से संबंधित कोई प्रपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
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सामान्य बिल पर किया जाता भुगतान
जिले में छोटी-बड़ी करीब 20,000 फर्में पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग 500 फर्मों की ओर से ग्राम पंचायतों में मेटेरियल की सप्लाई की जाती है। अधिकतर सप्लायर रसीद बिल पर ही सप्लाई और भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।

आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सप्लायरों से क्रय की जाने वाली सामग्री का विवरण, दुकान की चौहद्दी और फोटो मंगा ली जाए तो कइयों की सच्चाई सामने आ जाएगी। ग्राम पंचायत की ओर से टेंडर प्रक्रिया से लेकर बिल भुगतान में यह खेल होता है।

कर्मचारियों के नजदीकी फर्मों को महत्व
राज्य सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों का चेक पावर समाप्त करने के बाद पंचायतों में फर्जी वेंडरों की बाढ़ सी आ गई है। सचिव व अन्य ब्लॉक कर्मियों ने खुद, परिजन या फिर अपने रिश्तेदारों के नाम पर फर्मों का पंजीकरण करा रखा है। इनमें से अधिकांश फर्में सिर्फ कागज पर चल रही हैं।

वजूद इनकी ओर से ग्राम पंचायतों में निर्माण समाग्री, कंप्यूटर, स्टेशनरी, चुना, ब्लीचिंग आदि की सप्लाई की जाती है। सरकारी धन का आसानी से बंदरबांट के लिए ऐसी फर्में प्रधानों और सचिवों की पहली पसंद होती है।

बोले अधिकारी
मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधितों पर फर्म सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - ओजस्वी राज, सीडीओ
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