इसी बीच मुबारकपुर निवासी डॉ. आमिर फहीम ने फर्म के अभिलेखों के फर्जी होने की शिकायत सीआरओ और नगपालिका के प्रभारी से कर दी। उन्होंने इसमें लिखा था कि डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से यह प्रमाण पत्र तैयार किए गए है। इस शिकायत पर जांच शुरू हो गई। जांच में पुष्टि हुई कि फर्म द्वारा फर्जी अभिलेखों के सहारे नगरपालिका से बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये के ठेके लिए गए। इस पर ईओ नगरपालिका ने सीआरओ के निर्देश पर फर्म के सारे भुगतानों पर रोक लगा दिया।
साथ ही फर्म को पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया। लेकिन, उनकी ओर से डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से तैयारी कर लगाए गए फर्जी प्रमाण पत्रों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर धरवारा गांव निवासी अखिलेश सिंह ने शनिवार को अपर आयुक्त प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ पूर्व में किए गए भुगतान की रिकवरी कराए जाने की मांग की।
इस संबंध में हमारे पास शिकायत आई थी, यह मामला जिला स्तर का था तो मैंने सीआरओ को इस मामले में उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है। - प्रमोद कुमार पांडेय, अपर आयुक्त प्रशासन।
इस प्रकरण की जानकारी हमें है। हमने इसमें वर्कआर्डर को निरस्त कर दिया है, भुगतान पर रोक लगा दी है। फर्म को काली सूची में डालने के साथ ही उसके एफडीआर को जब्त कर लिया है। अब नई शिकायत आई है तो एक जांच समिति गठित कर इसकी जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। - संजीव ओझा, सीआरओ व प्रशासक मुबारकपुर नगरपालिका।