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Varanasi News: जिला अस्पताल से रेफर मरीजों को नहीं मिली एंबुलेंस, ऑटो और बाइक से ले गए परिजन

Fri, 03 Oct 2025 05:04 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी के जिला अस्पताल में एंबुलेंस देरी से आने के कारण मरीजाें और तीमारदारों को काफी किल्लत हुई। उन्हें ऑटो-टोटो से दूसरे अस्पताल जाना पड़ा। 
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ऑटो में बैठकर दूसरे स्थान पर जाते मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांडेयपुर के दीनदयाल अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर से बीएचयू और अन्य अस्पतालों के लिए रेफर मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिली। जिसकी वजह से तीमारदार और मरीजों को डेढ़ घंटे इंतजार के बाद ऑटो और बाइक से अस्पताल जाना पड़ा। 

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मरीजों के परिजन एंबुलेंस के लिए लगातार 108 नं. पर कॉल करते रहे। कॉल रिसीव करने वाले ने पहले तो एंबुलेंस भेजने की बात कही, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं आई। 

दीनदयाल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर से रोज 8-10 मरीजों को रेफर किया जाता है। गंभीर रोगों के मरीजों के लिए डॉक्टर्स ही नहीं हैं। मरीजों को बीएचयू या दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है। यहां न तो आर्थो के डॉक्टर्स हैं और न ही सर्जरी के। न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी में भी नियुक्ति नहीं है। 

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इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सर सुंदरलाल अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है या फिर इमरजेंसी में कोई जूनियर डॉक्टर सामान्य मरहम-पट्टी कर के छुट्टी दे देता है। डॉ. पीयूष कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में पल्मोनरी टीबी का इलाज नहीं हो पाता है। मरीज को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भेजा गया है।

केस 1 - चौबेपुर क्षेत्र के डुबकियां के दिलशाद अहमद (70) को गैस्ट्रोलॉजी की शिकायत थी। परिजन दीनदयाल अस्पताल ले आए। यहां से हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने बीएचयू रेफर कर दिया। दिलशाद के बेटे शम्स तबरेज ने 108 और 102 नं. पर एंबुलेंस के लिए कॉल की। 30 मिनट तक इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। उन्हें ऑटो से बीएचयू ले जाना पड़ा। 

केस 2 - मैदागिन की रहने वाली एक युवती को लंबे समय से टीबी की शिकायत थी। 6 महीने से दवा चल रही थी। बुधवार को हालत गंभीर होने पर उन्हें ट्राॅमा सेंटर लाया गया। चिकित्सकों ने दवा देकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल रेफर कर दिया। डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। नतीजन मरीज को बाइक से अस्पताल ले जाना पड़ा।
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टीबी के सभी वैरियंट का जिला अस्पताल में इलाज होता है। मरीज को क्यों रेफर किया गया, इसकी जांच कराई जाएगी। 108 नं. एंबुलेंस लखनऊ से ऑपरेट होती है। - डॉ. आरएस राम, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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