इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सर सुंदरलाल अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है या फिर इमरजेंसी में कोई जूनियर डॉक्टर सामान्य मरहम-पट्टी कर के छुट्टी दे देता है। डॉ. पीयूष कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में पल्मोनरी टीबी का इलाज नहीं हो पाता है। मरीज को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भेजा गया है।
केस 1 - चौबेपुर क्षेत्र के डुबकियां के दिलशाद अहमद (70) को गैस्ट्रोलॉजी की शिकायत थी। परिजन दीनदयाल अस्पताल ले आए। यहां से हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने बीएचयू रेफर कर दिया। दिलशाद के बेटे शम्स तबरेज ने 108 और 102 नं. पर एंबुलेंस के लिए कॉल की। 30 मिनट तक इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। उन्हें ऑटो से बीएचयू ले जाना पड़ा।
केस 2 - मैदागिन की रहने वाली एक युवती को लंबे समय से टीबी की शिकायत थी। 6 महीने से दवा चल रही थी। बुधवार को हालत गंभीर होने पर उन्हें ट्राॅमा सेंटर लाया गया। चिकित्सकों ने दवा देकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल रेफर कर दिया। डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। नतीजन मरीज को बाइक से अस्पताल ले जाना पड़ा।
टीबी के सभी वैरियंट का जिला अस्पताल में इलाज होता है। मरीज को क्यों रेफर किया गया, इसकी जांच कराई जाएगी। 108 नं. एंबुलेंस लखनऊ से ऑपरेट होती है। - डॉ. आरएस राम, सीएमएस, जिला अस्पताल।