परिजनों के मुताबिक, बभनी सीएचसी पर इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था। वह परिसर स्थित डॉक्टर के आवास पर पहुंचे। दरवाजा खटखटाया, आवाज लगाई, मरीज की पीड़ा देख चीखने लगे, गिड़गिड़ाते हुए डॉक्टर से बाहर आकर इलाज करने की गुहार लगाते रहे। मगर, अंदर से कोई जवाब नहीं आया। लोगों ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. गिरधारी लाल से संपर्क किया तो उन्होंने अवकाश पर होने का हवाला देते हुए डॉक्टर को भेजने की बात कही। भोर में करीब साढ़े पांच बजे जब डॉक्टर पहुंचे तब तक अस्पताल परिसर में बबलू की मौत हो चुकी थी।
आरोप है कि जब डॉक्टर से रात में न आने का कारण पूछा गया तो वह परिजनों पर ही रौब दिखाने लगे। गुस्साए लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी के गेट पर नारेबाजी व प्रदर्शन किया। इसकी शिकायत सीएमओ से भी की। प्रदर्शन करने वाले दुर्गावती, सोनामती, रामचंद्र, रामदेव, रामदास, रमेश, लक्ष्मण, राजेश्वर, राम अवतार, रामप्रसाद आदि रहे।
बोले अधिकारी
इस संदर्भ में सीएमओ डॉ. नेम सिंह का कहना है कि इमरजेंसी में एक डॉक्टर की तैनाती होती है। अस्पताल में बृहस्पतिवार की रात किसकी ड्यूटी थी और वह ड्यूटी पर क्यों नहीं था, इस बारे में जानकारी लेकर समुचित कार्रवाई की जाएगी।