परिवार के लोगों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल का पर्चा और गाड़ी में गंभीर अवस्था में मरीज को दिखाया फिर भी वहां की पुलिस पर कोई असर नहीं पड़ा। सारी कोशिश नाकाम हो गई तो घर वाले मायूस होकर मरीज को लेकर जौनपुर लौट आए। शहर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार शुरू होने के कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई।
मृतक के भतीजे दीनानाथ यादव का कहना है कि जिस स्थान पर पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया वहां से अस्पताल की दूरी महज 40 किलोमीटर थी। करीब आधे घंटे का समय पुलिस चेक पोस्ट पर ही बीत गया। बाद में वहां से 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के अस्पताल पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी। जहां उपचार शुरू होने के कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई। अमरनाथ अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी पत्नी प्रभावती देवी, बेटा राहुल, दीपक समेत अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जौनपुर एएसपी सिटी डॉ. अनिल पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन में किसी मरीज को या फिर दवा लेने के लिए कोई मेडिकल पर जा रहा है तो उसे पुलिस नहीं रोक सकती। यह निर्देश सरकार की ओर से भी जारी किया गया है। जिले के सभी थानेदारों को इसका पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रयागराज जिले की पुलिस ने ऐसा किया है तो गलत है।