अभिभावक जानकारी न होने का हवाला देते हैं, जबकि हकीकत यह है कि अस्पताल से छुट्टी के बाद उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया और अब स्कूलों में प्रवेश के समय दस्तावेज की अनिवार्यता सामने आने पर परेशानी उठानी पड़ रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, आवेदन के साथ अस्पताल का रिकॉर्ड, माता-पिता के पहचान पत्र और शपथ पत्र जमा करना अनिवार्य है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित विभाग को दस्तावेज भेजे जाते हैं, जहां से प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के आवेदनों पर प्राथमिकता से कार्रवाई जारी है। सभी अभिभावकों को समय सीमा में प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।