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राग दरबारी गाने वाले पं. जसराज नहीं बनें दरबारी, रागदारी के साथ भक्ति संगीत को भी दिया बराबर सम्मान 

Tue, 18 Aug 2020 12:02 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पंडित जसराज। (फाइल फोटो)
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विश्वविख्यात सरोद वादक स्व. पं. ज्योतिन भट्टाचार्य ने कहा था कि मैं राग दरबारी बजाता हूं मगर दरबारी बन नहीं पाया। इसलिए पद्म सम्मानों की झड़ी मेरे दरवाजे नहीं पहुंची। पं. जसराज जी भी राग दरबारी गाते थे दरबारी नहीं  बने  इसलिए भारत रत्न उनके दरवाजे नहीं पहुंचा। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य का। 

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उन्होंने कहा कि इंसान की कमर झुकती नहीं है बेवजह। पं. जसराज की कमर भी झुकी नहीं थी। एक मजबूत रीढ़ की हड्डी वाला शास्त्रीय गायक। स्वाभिमान का बोध है ऐसे शास्त्रीय गायक। वह बड़ा होता है। वह शास्त्रीय संगीत के सव्यसाची थे। उन्होंने रागदारी के साथ भक्ति संगीत को भी बराबर का सम्मान दिया। सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण दिया। 

उनके प्रशंसकों को उम्मीद थी कि उन्हें भारत रत्न भी मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 21 साल की उम्र से ही संपूर्ण विश्व में ऐसा कोई आयोजन नहीं था जहां उनका कार्यक्रम नहीं हुआ। संकटमोचन से उनका लगाव गत 50 वर्षों की एक अद्भुत यथा कथा है। 

70 के दशक से उन्होंने संकटमोचन संगीत समारोह में आना शुरू किया तबसे खुद को कभी आने से नहीं रोका। बनारस में हनुमान जी और काली पर भजन लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ। उनका स्वरूप बेहद दिव्य था। वचनकुशल और मृदुभाषी थे। 

जब पहली बार महिला कलाकार ने लगाया था सुर

पं. जसराज के परिवार ने संकटमोचन संगीत समारोह में क्रांति की थी। संगीत समारोह में महिलाएं नहीं गाती थीं। 1987-88 के दौरान प्रतापनारायण ने तानपुरे पर कंकणा बनर्जी को बैठाया और इशारा किया सुर लगाने को। कंकणा बनर्जी के चलते संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर महिलाओं का प्रवेश आरंभ हो गया। 

पं. जसराज भी मौजूद थे उनसे लोगों ने पूछा तो उन्होंने भी हामी भरी। महंत वीरभद्र मिश्र ने भी कोई आपत्ति नहीं की। इसके बाद महिला कलाकारों की प्रस्तुतियां आरंभ हो गईं। अखबार पढ़कर भड़क गए थे एक बार उन्होंने राग नट नारायण गाया था। संचालक ने बताया कि इसको सुनने से हाई ब्लडप्रेशर में मरीजों को आराम मिलता है। 

उस समय मैंने रिपोर्टिंग की तो लिखा कि प्रांगण में कई मधुमेही उपस्थित रहे और उनको बड़ी तकलीफ हुई कि पं. जसराज ने मधुमेह का राग क्यों नहीं गाया। पं. जसराज अखबार पढ़कर भड़क गए। पता लगाया किसने लिखा है। मुझे शाम को उनके सामने ले जाया गया।

उन्होंने कहा कि बहुत बड़े समझदार हैं। मैंने कहा बहुत बड़ा तो पता नहीं लेकिन संगीत समझता हूं। कहा कि आपने व्यंग्य किया है। मैंने कहा नट नारायण गाइए, लेकिन वह हाई ब्लडप्रेशर के लिए है या लो ब्लडप्रेशर के लिए ऐसा मत कहिए। इसके बाद मामला शांत हो गया।
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मैं बैठकर गा सकता हूं आप बैठकर सुन नहीं सकते....

अंतिम बार वह एक विशेष आयोजन में गा रहे थे तो पं. छन्नूलाल उठकर जाने लगे। जसराज जी ने पूछा कहां जा रहे है। पं. छन्नूलाल ने कहा कि हमार उमर हो गइल हौ। जसराज जी ने तुरंत बोला कि मैं आपसे उम्र में बड़ा हूं 85 साल का हूं। मैं बैठकर गा सकता हूं और आप बैठकर सुन नहीं सकते हैं। यह बात श्रोताओं को गदगद कर दी गई।
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