सेवापुरी। काशी के अति महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध पंचक्रोशी मार्ग मरम्मत के बाद भी बदहाल नजर आ रहा है। पिछले साल इस सड़क के लिए अलग से बजट जारी किया था। पीडब्ल्यूडी विभाग का दावा है कि 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। लेकिन हकीकत यह है कि सड़क और पाथवे जगह-जगह टूट चुके हैं। सड़क के सुंदरीकरण के नाम पर कुछ नजर नहीं आ रहा है।
इस सड़क की धार्मिक महत्ता को देखते हुए पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे संवारने का आदेश दिया था। सड़क की मरम्मत के साथ पैदल यात्रियों के लिए पाथवे बनाया जाना था। सड़क के दोनों किनारों पर छायादार पेड़ लगाए जाने थे। पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क की मरम्मत काम शुरू कराया। कुछ जगहों पर पाथवे का भी निर्माण किया गया। वन विभाग ने छायादार पेड़ भी लगाए। लेकिन अब स्थिति यह है कि सड़कें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। पंचक्रोशी यात्रा के तीसरे पड़ाव रामेश्वर के पहले हरसोस, दिनदासपुर, जंसा, बरेमा, भाऊपुर, हरिहरपुर, हिरमपुर के पास पाथवे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जगहों पर तो बीच-बीच में पाथवे बना भी नहीं है। इस मार्ग पर लगाए गए ज्यादातर पौधे सूख चुके हैं। सड़क के किनारे लगी जाली से पता चलता है कि पौधे लगाए गए लेकिन उनकी देखभाल नहीं हो सकी।
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प्रतिबंधित होने के बावजूद चल रहे भारी वाहन
सेवापुरी। पंचक्रोशी मार्ग पर भारी वाहन प्रतिबंधित हैं। बावजूद इस मार्ग पर बड़े वाहन चलते हैं। इससे पंचक्रोशी यात्रियों की सुविधा के लिए बना पाथवे क्षतिग्रस्त हो रहा है। कुछ दिन पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने जंसा चौराहा पर साइड गेज लगाकर ट्रकों के संचालन पर रोक लगा दी थी। बाद में साइड गेज को हटा दिया गया। जंसा पुलिस की मिलीभगत से ट्रकों का संचालन रात में होता है।
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10 किलोमीटर की दूरी में एक दर्जन से अधिक हैं ब्रेकर
राजातालाब। पंचक्रोसी परिक्रमा मार्ग पर कंदवा से भीमचंडी तक लगभग 10 किलोमीटर की दूरी में दर्जनों ब्रेकर बने हुए हैं। सड़क के चौड़ीकरण के समय ब्रेकर बनाए गए थे। जहां-जहां ब्रेकर हैं वहां सड़क के किनारे संकेतक भी नहीं बनाया गया है। जिस कारण से आए दिन हादसे हो रहे हैं। सड़क पर हजारों लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं। लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कई बार सड़क को जांचा परखा लेकिन इस ब्रेकर की तरफ उनका ध्यान नहीं गया।
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सालभर पहले बनी सड़क उखड़ने लगी
राजातालाब। पिछले साल निर्मित पंचक्रोसी परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह पानी लगने लगा है। लठिया गांव में लगभग 15 मीटर की दूरी में पूरी सड़क ही पानी में डूब गई है। अगर परिक्रमा करने वाले भक्तजन यहां से पैदल चले तो बिना पानी में पैर डाले नहीं निकल सकते। ऐसा ही कुछ हाल अमरा गांव में भी है। यहां सालभर पहले बनी सीसी रोड उखड़ने लगी है। बरसात हो जाने के बाद सड़कों पर जलभराव हो जाता है।
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भीमचंडी में जगह-जगह सड़कें खराब, पटरिया अधूरी
राजातालाब। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग के द्वितीय पड़ाव भीम चंडी में भी जगह-जगह सड़कें टूट गई हैं। मरम्मत के एक साल के अंदर ही सड़क कई जगह धंस गई हैं। सोमवार को हल्की बरसात के बाद कई जगह सड़कों पर पानी लगा रहा। सड़क के किनारे लगे इंटरलॉकिंग ब्रिक भी जगह-जगह दब गए हैं। कई जगहों पर इसे अधूरा छोड़ दिया गया है। पटरियों पर बड़े-बड़े घास उग गए हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को चलना काफी मुश्किल होगा।
कोट-----------------
इस मार्ग पर पिछले साल काम शुरू कराया गया था। लॉकडाउन हाने से काम बंद कराया गया था। जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। अक्तूबर तक काम पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
-सुग्रीम राम, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
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90 करोड़ का प्रोजेक्ट है। 85 फीसदी काम हुआ है। कुछ जगहों पर विवाद के कारण काम छोड़ा गया है। जिला प्रशासन से सहयोग लेकर काम पूरा कराया जाएगा।
-एसके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता
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काशी में पंचक्रोशी यात्रा से मिलता है मोक्ष
राजातालाब। काशी के पंचकोश करना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। यह व्यक्ति के परलोक को भी सुधरता है। मानस मर्मज्ञ मिल्की चक मातल देवी निवासी पंडित नंद लाल उपाध्याय ने बताया कि पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर पांच महत्वपूर्ण पड़ाव कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर व कपिलधारा है। कंदवा में भगवान शिव की आराधना का विशेष प्रावधान है जबकि भीम चंडी में आदिशक्ति भीम चंडी माता की दर्शन पूजन श्रद्धालु करते हैं। यहां श्रद्धालु गंधर्व सागर में स्नान भी करते हैं। रामेश्वर में वरुणा नदी के किनारे भगवान राम की शिव आराधना से जुड़ा केंद्र है। शिवपुर में पांचो पांडव का दर्शन पूजन किया जाता है जबकि कपिलधारा में कपिल मुनि को लोग श्रद्धा अर्पित करते हैं। बताया कि काशी क्षेत्र विमुक्त क्षेत्र है। पंचकोश के अंदर आने वाला क्षेत्र मूल काशी कही जाती है। पंचकोश तीन तरह से होती है जिसमें एक दिन की यात्रा भी लोग पूरी करते हैं। मलमास में भी यात्रा की जाती है। इस साल क्वार महीने में पंचकोशी यात्रा का विधान है।