कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा कि फिल्म ‘पद्मावत’ पर उठे विवाद के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। सरकार की शह पर इसे जानबूझ कर तूल दिया जा रहा है। सरकार चाहती तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
पराड़कर भवन में आयोजित एक संगोष्ठी में हिस्सा लेने काशी पहुंचे कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि धर्म और जाति की राजनीति के लिए भाजपा ने पद्मावत के विवाद को हल करने के बजाए उसे मुद्दा बना दिया।
कांग्रेस सरकार में भी ऐसे विवाद कई बार आते रहे लेकिन तय प्रक्रिया के तहत उनका यथोचित हल निकाला गया। दावा किया कि उन्होंने कल ही यह फिल्म देखी है और उसमें ऐसा कुछ भी नहीं जिस पर इस तरह देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाए।
यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उसका विरोध कर एक तरह से सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं।
बीसीसीआई और आईपीएल से जुड़े राजीव शुक्ला ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया। कोई भी टीम लगातार नहीं जीत सकती। कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजर रवि शास्त्री के विरोधाभाषी बयान पर कहा कि कहीं कोई विवाद नहीं है।
कट्टरता व सांप्रदायिकता से देश का भला नहीं
संगोष्ठी में सम्बोधन करते राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
धार्मिक और सांप्रदायिक कट्टरता की संकीर्ण सोच किसी भी राष्ट्र की एकता और विकास की सबसे बड़ी चुनौती होती है। पाकिस्तान के पिछड़ापन और दुबई के समृद्ध विकास का अंतर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
पाकिस्तान की धार्मिक-सांप्रदायिक कट्टरता की राजनीति ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती और उसके विकास में सबसे बड़ा बाधक है। आज देश में भी कट्टरता, सांप्रदायिकता के उसी तरह के हालात बनाए जा रहे हैं। ये बातें कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने वाराणसी में कहीं।
उन्होंने नाम लिए बगैर मोदी सरकार पर धर्म और जाति की राजनीति का आरोप लगाया। कहा कि धर्म और जाति की राजनीति देश को तोड़ती है। नेतृत्व किसी के हाथ में हो, उसे सामाजिक सरोकारों पर गौर करना चाहिए।
वह मंगलवार को काशी बौद्धिक मंच की ओर से पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित राष्ट्रीय एकता की चुनौतियां विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने 45 मिनट के संबोधन में बीजेपी या नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया लेकिन मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
केंद्र की अर्थ नीति, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। कहा कि सरकार कोई रहे अर्थ, विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा की नीति नहीं बदलनी चाहिए। नोटबंदी के फैसले पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।