विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर तोड़े जा रहे काशी के प्राचीन मंदिरों और वर्षों से पूजित देव विग्रहों के विरोध में चल रहे आंदोलनम के चौथे चरण में अब काशी विश्वनाथ से सोमनाथ तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी।
इसके बाद काशी में धर्म संसद और अगले साल इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ में विश्व धर्म संसद में भी इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया जाएगा। यह जानकारी श्री विद्यामठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार शंकराचार्य घाट पर आयोजित प्रेसवार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि मंदिरों और देव विग्रहों की रक्षा के लिए शुरू मंदिर बचाओ आंदोलनम के तीन चरण पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद मंदिरों को बचाने के लिए कोई पहल नहीं हुई है।
ऐसे में मजबूर होकर चौथे चरण के आंदोलन की घोषणा करनी पड़ रही है। बताया कि मंदिरों की रक्षा के लिए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के निर्देश पर ही आंदोलनम शुरू किया गया है।
पुरी के शंकराचार्य ने दिया दिशा-निर्देश
विश्व धर्म संसद में रखा जाएगा मंदिर ध्वस्तीकरण का मुद्दा
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पुरी के शंकराचार्य से भी इस बारे में दिशा-निर्देश लिया जा चुका है। अब जरूरत पड़ी तो तीसरे शंकराचार्य से भी वार्ता की जाएगी। चौथा चरण पांच भागों में विभक्त होगा। इसके तहत जनधनदेवकृपा संग्रह, विश्वनाथ से सोमनाथ तक मंदिर बचाओ आंदोलन पदयात्रा, काशी में धर्म संसद, फिर कुंभ में विश्व धर्म संसद उसके बाद प्रयागराज से ही मशाल यात्रा निकलेगी, जो देश के हर प्रांत के हर गांव में जाएगी।
आंदोलन केंद्र में अगली सरकार बनने तक जारी रहेगा। पहले भाग में 71 दिनों तक काशी के 71 स्थानों पर हनुमान चालीसा का अखंड पाठ होगा और इसके बाद 81 दिनों की काशी विश्वनाथ से सोमनाथ तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी।
इसके बाद पौष माह में काशी में धर्म संसद होगी और इसके बाद कुंभ में विश्व धर्म संसद का आयोजन होगा। अगस्त में होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन में भी आंदोलनम के प्रतिनिधि जाएंगे और काशी की दुर्दशा बताएंगे।
उद्योगपतियों के लिए उजाड़े जा रहे छोटे व्यापारी
बाबा विश्वनाथ के दरबार की व्यवस्था आस्था की जगह किसी बड़े उद्योग की विस्तार व्यवस्था के तहत चल रही है। जैसे एक पूंजीपति व्यक्ति व्यापार को शुरू करने से पूर्व इंवेस्टमेंट करता है, उसी तर्ज पर कॉरिडोर योजना के नाम पर छोटे व्यापारियों को उजाड़कर औद्योगिक संस्थान के निर्माण से कौन सा विकास होगा। उक्त बातें विश्वनाथ गली व्यावसायिक समिति की बैठक के दौरान वक्ताओं ने कही।
सोमवार को अपारनाथ मठ के पास स्थित कार्यालय में हुई बैठक में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार द्वारा गठित श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद अध्यादेश की धारा 6 (6) की विसंगतियों पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि परिषद को विशिष्ट क्षेत्र में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन का अधिकार प्राप्त है। इसका मतलब है कि पहले विकास योजना के नाम पर छोटे व्यापारियों को उजाड़ो, फिर कारपोरेट जगत को बसा दो।
बैठक में निर्णय लिया गया कि धारा 6 (6) की विसंगतियों को नगर के व्यापारियों और संगठन के बीच प्रचारित-प्रसारित करने के लिए मंगलवार से जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर अध्यादेश में छोटे व्यापारियों को उजाड़ने वाले नियमों को संशोधित करने की मांग करेगा।