प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि बनारस गंगा नदी के मोड़ पर स्थित है। मोड़ पर सेंट्रीपेटल और सेंट्रीफ्यूगल फोर्स काम करता है। क्योंकि यह साइड ऊंचा और मिट्टी का है। नदी में लंबाई दिशा का वेग दूसरे तरफ की तुलना में कम होता है। यहां, चौड़ाई दिशा का वेग शहर की ओर होता। इसलिए शहर से नदी में प्रवाहित हो रहे मलजल किनारे-किनारे ही धीरे-धीरे फैलते हैं।
गंगा बेसिन के न्यूनतम ताप में हो रही है बढ़ोतरी
पिछले दशक में गंगा बेसिन में सर्दियां गर्म होने लगी हैं और गर्मी में भी तेजी से बढ़ाव हो रहा है। बेसिन में औसत अधिकतम तापमान गर्मियों में 32.3 डिग्री सेल्सियस और सर्दियों में 23.1 डिग्री सेल्सियस है। बेसिन में औसत न्यूनतम तापमान गर्मियों में 21.5 डिग्री सेल्सियस और सर्दियों में 6.4 डिग्री सेल्सियस है।
प्री मानसून सीजन गंगा बेसिन में सबसे गर्म होता है, जिसमें औसत तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस होता है। गंगा बेसिन में हर मौसम में न्यूनतम तापमान में वृद्धि हो रही है। सर्दियों में न्यूनतम तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हुई है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 1993 में गंगा बेसिन में जल की मात्रा 525.02 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) से घटकर 509.52 बीसीएम पर पहुंच गई है। यानी जल उपलब्धता में 16 बीसीएम की कमी आई है। भूजल दोहन और तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण के कारण जल की मात्रा कम हुई है।
गंगा बेसिन का प्रवाह क्षेत्र यानी कैचमेंट एरिया 8 लाख 38 हजार 803 वर्ग किलोमीटर रह गया है जो 1993 में 8 लाख 61 हजार 452 वर्ग किलोमीटर हुआ करता था। 1985 से 2015 के बीच गंगा बेसिन में 914 बीसीएम बरसात हुई थी जबकि 1965-1984 के बीच गंगा बेसिन में 947 बीसीएम बरसात हुई थी।
यह आंकड़ा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। एक बीसीएम में एक हजार अरब लीटर पानी होता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर दशक में औसतन 0.23 फीसदी बरसात में कर्मी दर्ज की जा रही है।