फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘अपनों’ पर रहम गरीबों पर सितम

Tue, 24 May 2016 01:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
बकाया वसूलने में किसानों और गरीबों के साथ जिस प्रकार की बर्बरता होती है, वैसा कुछ भी सरकारी विभागों के बड़े बकायेदारों के साथ नहीं होता। एक किसान से दो लाख रुपये की कर्ज वसूली के लिए अमीन उसकी जान के पीछे पड़ जाता है। प्रताड़ना से आजिज आकर सैफई का यह किसान लखनऊ में सीएम आवास के बाहर जहर खाने को विवश हो जाता है मगर यहां कई ऐसे सरकारी विभाग हैं जिनका दूसरे सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपया बकाया है मगर उनसे वसूली नहीं की जा रही है। सरकारी मुलाजिम अपनों पर तो रहम कर रहे मगर गैरों पर उनका सितम बदस्तूर जारी है।
विज्ञापन



जिले में बिजली, नगर निगम, परिवहन, जलकल तमाम ऐसे सरकारी महकमें हैं जिनका दूसरे सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपया बकाया है। अकेले बिजली विभाग की बात करें तो 15 करोड़ रुपय से अधिक के बकाएदार सरकारी विभाग हैं। बाकी अन्य विभागों का भी अलग-अलग विभागों पर पांच करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। यह बकाया सालों से चला आ रहा है। न तो बकाएदार विभाग भुगतान को लेकर गंभीर है और न ही बिजली विभाग की वसूली को लेकर संजीदा है। जबकि नियम है कि दस हजार रुपये से अधिक का बकाया होते ही कनेक्शन काट दिया जाता है। बिजली के बड़े बकाएदारों में सरकारी स्कूल-कॉलेज से लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तर भी शामिल हैं।


खास बात यह भी कि बकाया वसूली के लिए संबंधित विभागों को पूर्व में नोटिस तो जारी हुआ मगर इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कनेक्शन भी काटने की हिम्मत बिजली विभाग नहीं जुटा सका। बिजली विभाग का सबसे अधिक 476 लाख रुपये का बिल परिषदीय और सरकारी विद्यालयों पर बकाया है। जिले में 1014 प्राथमिक  एवं 354 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं, जबकि सरकारी इंटर कॉलेजों की संख्या 30 से अधिक है। पुलिस विभाग और नगर निगम भी बड़े बकाएदारों में हैं। सबसे कमाऊ विभागों में शुमार आबकारी विभाग पर 11 लाख रुपये बिजली बिल का बकाया है।
विज्ञापन



नगर निगम आम शहरियों से तो गृह कर जबरन वसूल ले रहा है मगर सरकारी दफ्तरों पर उसका लाखों रुपये बकाया है। दीनदयाल अस्पताल पर 32 लाख रुपये और एलटी कॉलेज पर 31 लाख रुपये का गृह कर बकाया है। इतना ही नहीं विकास भवन को भी गृह कर के रूप में नगर निगम को 15 लाख रुपये का भुगतान करना है।


सरकारी विभागों पर बिजली विभाग का 15 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। यदि बकाए का पूरा भुगतान हो जाए तो इस धन से जिले के सौ गांवों को पर्याप्त मात्रा में बिजली मिलने लगेगी। 30 से अधिक नए ट्रांसफार्मर लगाए जा सकते हैं, जिससे शहर की एक बड़ी आबादी को लो वोल्टेज से निजात मिल सकती है। वहीं नगर निगम को यदि गृह कर का पूरा पैसा मिल जाए तो शहर के हरेक सीवर की टंकी पर लोहे का ढक्कन लग सकता है। पक्के महाल की जर्जर हो चुकी गलियों में पांच किलोमीटर तक नए पत्थर भी बिछाए जा सकते हैं।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें