फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएम ने किया हस्तक्षेप तब हुआ अंतिम संस्कार

Tue, 24 May 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
राजातालाब तहसील के निरीक्षण के दौरान लोगों से मुखातिब होते डीएम
विज्ञापन
जौनपुर में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक ही परिवार के तीन सदस्यों के अंतिम संस्कार के लिए रविवार की रात हरिश्चंद्र घाट के विद्युत शवदाह गृह में जमकर किचकिच हुई। मुफ्त में चलने वाले इस शवदाह गृह में पति, पत्नी और पुत्र के शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिवारीजनों को घंटों गिड़गिड़ाना पड़ा लेकिन कर्मचारी काम ठप कर चले गए। राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार के हस्तक्षेप पर जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने आधी रात को शवदाह गृह खुलवा कर तीनों शवों का अंतिम संस्कार कराया। 
विज्ञापन


विधानसभा सचिवालय में तैनात रहे चंदौली के नौगढ़ निवासी रामायण सिंह की पत्नी शीला और पुत्र अनंत के साथ शनिवार की शाम जौनपुर में हुए सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद रविवार की रात तीनों शवों को अंतिम संस्कार के लिए हरिश्चंद्र घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में ले जाया गया। वहां जाने के बाद शवदाह गृह के प्रबंधक केदार नाथ राय ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। पहले उनका कहना था कि रात 10 बजे तक ही शवदाह गृह चालू रहता है।

अब काम करना संभव नहीं है। इसके बाद परिवारीजनों से शवदाह कर्मियों की जमकर किचकिच हुई। तमाम मशक्कत के बाद भी जब कर्मियों ने नहीं सुनी और वह ताला लगा कर चले गए। इसकी जानकारी मिलने पर पार्षद राजेश यादव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी शवदाह गृह खुलवाने का प्रयास किया लेकिन कामयाब न हो सके। इसके बाद किसी ने इस घटना की जानकारी राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार को दी। सांसद ने जिलाधिकारी को घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद डीएम ने रात 12 बजे के बाद भेलूपुर पुलिस को भेजकर शवदाह गृह खुलवाया। 
विज्ञापन


कर्मियों को पुलिस घरों से ले आई। इसके बाद तीनों शवों का चार बजे भोर तक निस्तारण कराया गया। मुफ्त में चलने वाले इस शवदाहगृह में तीनों शवों के  निस्तारण के लिए नौ सौ रुपये भी लिए गए। शवदाह गृह के प्रबंधक केदार राय ने बताया कि दो कर्मी काम छोड़कर चले गए थे और शवों की सुपुर्दगी का कागज भी अधूरा था। उस पर पुलिस की मुहर नहीं लगी थी। डीएम के निर्देश पर प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके बाद शवों का निस्तारण कराया गया। रही बात पैसे लेने की तो ऐसी बात नहीं है सिर्फ बांस और मुखाग्नि के लिए निर्धारित शुल्क ही जमा कराए गए थे।  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें