सत्ता परिवर्तन के साथ ही पूर्वांचल में ओवरलोड ट्रकों की इंट्री का खेल थम गया है। इंट्री के नाम पर सभी जिलों में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली होती थी। इसका खुलासा नवंबर माह में अमर उजाला ने जौनपुर में किया था।
पूर्वांचल में सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर आदि जिलों में खनन का कार्य होता है। नियम है कि छह चक्के के ट्रक पर ट्रक सहित 16 टन, दस चक्के पर 25 टन और 12 चक्के पर 31 टन वजन होना चाहिए। लेकिन स्थिति यह है कि छह चक्के पर 25 टन, दस चक्के पर 40 टन और 12 चक्के पर 50 टन ओवरलोड ट्रक करते थे।
जिसकी आड़ में सभी जिलों के एआरटीओ ट्रकों की विभिन्न नामों से इंट्री करते थे। जिन ट्रकों की इंट्री नही होती थी उनके खिलाफ कार्रवाई होती और जिनकी इंट्री होती थी उन्हें छोड़ दिया जाता था।
जौनपुर में 6500 से 7000 ट्रकों की इंट्री थी जिनसे 1200 से 2500 रुपये अवैध वसूली परिवहन महकमा करता था। इसका खुलासा नवंबर माह में अमर उजाला ने अभियान चलाकर किया बावजूद इसके इंट्री का खेल नही थमा।
इसके पीछे सत्ता और शासन का खुला संरक्षण था। कहीं न कहीं मंत्री भी इस खेल में शामिल थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मार्च के अंतिम सप्ताह में बैठक कर डग्गामार और ओवरलोड के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया।
एक अप्रैल से इंट्री का खेल थम गया है। इंट्री करने वाले दलालों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आजमगढ में 300, जौनपुर में 700, गाजीपुर में 200, वाराणसी में 900, मिर्जापुर में 400 ही ट्रकों की इस माह इंट्री हुई है। जबकि यह आंकड़ा छह से आठ हजार के बीच होता था।