वाराणसी शहर में शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए करोड़ों की लागत से शहर भर में पानी की टंकियां खड़ी कर दी गईं। भूमिगत पेयजल पाइप का जाल बिछा दिया गया लेकिन ये किसी काम की नहीं। टीएसी जांच में पास हुईं पानी की टंकियों की हालत यह है कि उससे आपूर्ति एक बूंद नहीं हुई और उसका सरिया दिखने लगा है।
टेस्टिंग में जल रिसाव हो रहा है। राजघाट और अनंता नगर कॉलोनी के ओवरहेड टैंक इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। सिस वरुणा में 17 में से चार ओवरहेड टैंक अब तक जनोपयोगी साबित नहीं हो सके हैं।
राजघाट ओवरहेड टैंक : इसका निर्माण वर्ष 2012-13 में पूरा हुआ। वहां पर 2500 किलोलीटर क्षमता (एक किलो लीटर में एक हजार लीटर पानी) का ओवरहेड टैंक करीब दो करोड़ की लागत से बनाया गया। अब तक इसे चालू नहीं किया गया।
वजह टेस्टिंग में फेल होना और पाइपलाइन से रिसाव। इसके चलते करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी लोग शुद्ध पानी के लिए मोहताज हैं। इस टैंक से राजघाट, कोनिया, भदुऊं चुंगी, बसंता कालेज समेत एक दर्जन मुहल्लों में आपूर्ति होनी है।
अनंता नगर कालोनी टैंक : अंधरापुल-नदेसर मार्ग पर 2500 किलोलीटर का ओवरहेड टैंक अनंता नगर कॉलोनी में वर्ष 2013 में बनाई गई। इस टैंक पर भी करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए गए। अब तक इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इससे अनंता नगर, अंधरापुल, नदेसर के कुछ इलाकों में पेयजल आपूर्ति होनी है।